आसनसोल, पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में बालू की बढ़ती कीमत और उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. आसनसोल स्थित जिला शासक कार्यालय में बालू से जुड़े मुद्दों को लेकर जिले के विधायकों, प्रशासनिक अधिकारियों और बालू घाटों के पट्टाधारकों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की गई. बैठक में बालू की बाजार कीमत को नियंत्रित करने, उपलब्धता बढ़ाने, सरकारी योजनाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर बालू उपलब्ध कराने तथा परिवहन लागत कम करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
बैठक में पश्चिम बर्धमान के जिला शासक एस. पन्नम बालम ने कहा कि बालू की उपलब्धता और कीमत को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी करेगा. उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में 15 वैध बालू घाट संचालित हैं, जबकि 12 अन्य घाट पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं. इन 12 घाटों को स्वीकृति मिलने के बाद जिले में बालू की उपलब्धता में सुधार आने की उम्मीद है.
ट्रैक्टर के लिए घाट मूल्य ₹1,200 से अधिक नहीं
जिला शासक ने बैठक में बताया कि ट्रैक्टर के लिए घाट से बालू उठाने का घाट मूल्य ₹1,200 से अधिक नहीं होना चाहिए. घाट स्तर पर निर्धारित राशि से अधिक वसूली न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निगरानी करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही केवल घाट मूल्य ही नहीं, बल्कि बाजार में अंतिम कीमत यानी End Price पर भी प्रशासन की नजर रहेगी.
जिला प्रशासन के अनुसार, कीमतों की निगरानी के लिए अधिकारियों की घाट-वार और रोटेशन के आधार पर ड्यूटी लगाई जाएगी. जिन घाटों पर CCTV की व्यवस्था नहीं है, वहां CCTV लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
जिला शासक ने कहा कि बालू की कीमत और उपलब्धता को नियंत्रित करने में BDO, BLRO और RI आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे. जरूरत पड़ने पर आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट (ADPC) की भी सहायता ली जाएगी.
15 घाट चालू, 12 घाट पर्यावरणीय मंजूरी के इंतजार में
बैठक में जिले में संचालित बालू घाटों की स्थिति की भी समीक्षा की गई. प्रशासन के मुताबिक फिलहाल पश्चिम बर्धमान में 15 घाट उपलब्ध हैं, जबकि 12 घाट पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं. जिला प्रशासन का कहना है कि इन घाटों को मंजूरी मिलने और उनके संचालन में आने के बाद बालू की उपलब्धता बढ़ सकती है. हालांकि, तब तक उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है.
घाट नहीं वाले क्षेत्रों में स्टॉक पॉइंट बनाने का प्रस्ताव
बैठक में उन क्षेत्रों में स्टॉक पॉइंट बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया, जहां वैध बालू घाट उपलब्ध नहीं हैं. अधिकारियों के अनुसार, अंडाल, आसनसोल कॉरपोरेशन क्षेत्र, दुर्गापुर कॉरपोरेशन क्षेत्र और दुर्गापुर-फरीदपुर जैसे इलाकों में घाट की उपलब्धता सीमित है. ऐसे क्षेत्रों में स्टॉक पॉइंट बनने से परिवहन लागत कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि मौजूदा नियमों के अनुसार घाट से पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्टॉक पॉइंट बनाने को लेकर प्रतिबंध है. जिला प्रशासन ने कहा कि इस संबंध में विभाग से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि विशेष परिस्थिति में घाटविहीन क्षेत्रों में स्टॉक पॉइंट बनाने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं.
ट्रैक्टरों का पंजीकरण बढ़ाने पर जोर
जिला शासक ने कहा कि बालू की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ट्रैक्टरों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी बढ़ावा दिया जाएगा. जो ट्रैक्टर नियमों के तहत पंजीकरण कराना चाहते हैं, उनके पंजीकरण को सुगम बनाने की जिम्मेदारी BDO और BLRO की टीम को दी गई है.
प्रशासन का मानना है कि पंजीकृत वाहनों की संख्या बढ़ने से वैध तरीके से बालू के परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और अनियमितताओं पर नजर रखना आसान होगा.
सरकारी योजनाओं के लिए बालू की आपूर्ति को प्राथमिकता
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकारी योजनाओं के निर्माण कार्यों के लिए बालू की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी. जिला शासक ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण और VB-G-RAM-G जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की बात कही. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए प्रशासन बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. BDO और BLRO स्तर से संबंधित विभागों एवं पट्टाधारकों के साथ संपर्क बनाए रखने की बात भी कही गई.
बारिश खत्म होते ही सड़कों की मरम्मत
बैठक के दौरान जिले की खराब सड़कों का मुद्दा भी उठा. जिला प्रशासन ने बताया कि बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क मरम्मत का काम प्रभावित हुआ है. कई कार्यों के लिए प्रशासन को आवश्यक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं और कई जगहों पर टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है.
जिला शासक ने बताया कि AMC, ADDA, DMC और जिला परिषद समेत संबंधित एजेंसियां सड़क मरम्मत को लेकर तैयारी कर रही हैं. मौसम साफ होने के बाद काम शुरू किया जाएगा और प्रशासन का लक्ष्य 10 अक्टूबर तक अधिकतम सड़कों की मरम्मत पूरी करने का प्रयास करना है.
विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने भी उठाया बालू की कीमत का मुद्दा
आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने बैठक के बाद कहा कि बालू की कीमत बढ़ने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने बैठक आयोजित की. विधायक के अनुसार, बैठक में प्रशासनिक अधिकारी, बालू घाटों के लीज होल्डर तथा जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि बैठक में ट्रैक्टर के लिए ₹1,200 के घाट मूल्य पर जोर दिया गया है.
कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि यदि निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर कोई अधिक कीमत वसूलने की कोशिश करता है या बिचौलिया तंत्र के जरिए कीमत बढ़ाई जाती है, तो प्रशासन कार्रवाई करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले घाट संचालकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है और गंभीर मामलों में लीज रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.
CCTV और घाटों की निगरानी होगी तेज
बालू की कीमत और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए घाटों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया गया है. जिन घाटों पर CCTV उपलब्ध नहीं है, वहां CCTV लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा अधिकारियों की घाट-वार ड्यूटी और रोटेशन व्यवस्था के जरिए निगरानी की जाएगी.
बैठक में BDO, BLRO, ADM, SDO, SDLRO, पुलिस अधिकारियों और जिले के बालू घाटों के पट्टाधारकों समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे. जनप्रतिनिधियों और उनके प्रतिनिधियों ने भी बैठक में अपनी बात रखी.
प्रशासन का फोकस-कीमत, उपलब्धता और निगरानी
जिला प्रशासन के मुताबिक बैठक का मुख्य उद्देश्य बाजार में बालू की कीमत को नियंत्रित करने के साथ-साथ इसकी उपलब्धता बढ़ाना था. सीमित संख्या में संचालित घाटों के बावजूद परिवहन लागत कम करने और वैध आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के विकल्पों पर चर्चा की गई. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जिले में 15 स्वीकृत घाट संचालित हैं और इन्हीं घाटों से संबंधित नियमों एवं कीमतों की निगरानी की जाएगी. आने वाले दिनों में 12 अतिरिक्त घाटों को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने की स्थिति में आपूर्ति व्यवस्था में और सुधार की संभावना है.
जिला प्रशासन ने यह भी कहा कि मानसून समाप्त होने के बाद स्थिति की समीक्षा करते हुए आगे के कदम उठाए जाएंगे. वहीं, निर्माण कार्यों और सरकारी योजनाओं को बालू की कमी के कारण प्रभावित होने से बचाने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं. अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ₹1,200 के निर्धारित घाट मूल्य और अंतिम बाजार कीमत के बीच कितना अंतर रहता है.प्रशासन की निगरानी व्यवस्था इसे किस हद तक नियंत्रित कर पाती है.
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