आसनसोल, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले गुलाम मुस्तफा पैदल हज यात्रा के उद्देश्य से निकले थे. इसी दौरान आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के जुबली इलाके में कोलकाता-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के पास उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया. आरोप है कि युवक ने उन्हें अपमानित किया और उनकी धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया.
घटना की जानकारी मिलने के बाद एआईएमआईएम नेता दानिश अज़ीज़ के नेतृत्व में पार्टी की टीम ने मामले को गंभीरता से उठाया. टीम की ओर से किसी भी प्रकार के टकराव या हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से पुलिस-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई. एआईएमआईएम टीम ने आसनसोल नॉर्थ और साउथ थाना के अधिकारियों से लगातार संपर्क कर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग रखी.
27 अगस्त को आरोपी की गिरफ्तारी
एआईएमआईएम के अनुसार, लगातार प्रयासों के बाद 27 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 12 बजे पुलिस ने टीम को सूचना दी कि गुलाम मुस्तफा के साथ कथित मारपीट के मामले में आरोपी युवक को काली पहाड़ी स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी की गिरफ्तारी के बाद एआईएमआईएम नेता दानिश अज़ीज़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
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'संविधान से ऊपर कोई नहीं'
दानिश अज़ीज़ ने कहा कि भारत के संविधान से बड़ा कोई नहीं है और संविधान से ऊपर कोई नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, शासन और प्रशासन को संविधान और कानून के अनुसार ही काम करना चाहिए.
उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी से समाज में यह संदेश जाता है कि कानून सभी के लिए समान है और शिकायतों का समाधान संवैधानिक तरीके से किया जा सकता है.
'धर्म और पहचान के आधार पर भेदभाव स्वीकार नहीं'
दानिश अज़ीज़ ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, सम्मान और न्याय का अधिकार देता है. चाहे कोई हिंदू हो, मुसलमान हो, कांवड़िया हो, हज यात्री हो या किसी अन्य धर्म और समुदाय से जुड़ा व्यक्ति—कानून की नजर में सभी बराबर हैं.
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान, पहनावे, आस्था या यात्रा के आधार पर उसके साथ मारपीट, अपमान या दुर्व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता. किसी भी विवाद का समाधान कानून के रास्ते और संविधान के दायरे में ही होना चाहिए.
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'कानून हाथ में लेने के बजाय संवैधानिक रास्ता अपनाया'
AIMIM नेता ने कहा कि उनकी टीम ने इस मामले में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से न्याय की मांग की. उनके मुताबिक पुलिस की गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के रास्ते से भी न्याय की लड़ाई लड़ी जा सकती है.
दानिश अज़ीज़ ने कहा, “इस देश में संविधान से बड़ा कोई नहीं है और संविधान से ऊपर कोई नहीं है. कानून सबके लिए बराबर है. चाहे कोई हिंदू हो, मुसलमान हो, कांवड़िया हो या हज यात्री-हर नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और समान न्याय मिलना चाहिए.” उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच जारी रखने तथा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की.
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