उत्तर प्रदेश में प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा नियमावली-2026’ को मंजूरी दी गई. नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को नियुक्ति के समय जॉइनिंग लेटर देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा हर कर्मचारी की साल में कम से कम एक बार निःशुल्क स्वास्थ्य जांच करानी होगी. कार्यस्थल पर कैंटीन, रेस्ट रूम और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं. वहीं, महिला कर्मचारियों समेत अन्य कर्मियों की नाइट शिफ्ट को लेकर भी सुरक्षा और कामकाज से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं.
10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में नियुक्ति पत्र अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों को लिखित नियुक्ति पत्र देना नियोक्ता के लिए अनिवार्य होगा. इससे कर्मचारियों के पास रोजगार का आधिकारिक प्रमाण रहेगा और नौकरी से जुड़े अधिकारों को मजबूत आधार मिलेगा. हालांकि, घरेलू कामगारों और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को फिलहाल इस नियुक्ति पत्र संबंधी प्रावधान से बाहर रखा गया है.
साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच
नियमावली में कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है. कंपनी के खर्च पर हर एक कर्मचारी की साल में कम से कम एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच करानी होगी. इसके साथ ही कार्यस्थल पर संभावित स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिमों की पहचान कर उनसे बचाव के लिए जरूरी इंतजाम करना भी कंपनी की जिम्मेदारी होगी.
कैंटीन, रेस्ट रूम और साफ पानी की सुविधा
नई नियमावली के तहत कार्यस्थलों पर श्रमिकों के लिए पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करनी होगी. महिलाओं और पुरुषों के लिए आवश्यक शौचालय और स्नानघर उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है. काम के दौरान आराम के लिए रेस्ट रूम या विश्राम कक्ष की सुविधा देनी होगी. बड़े प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिए कैंटीन की व्यवस्था भी कंपनी की ही जिम्मेदारी होगी. दुर्घटना या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में प्राथमिक उपचार की सुविधा रखना भी जरूरी होगा.
महिलाओं के नाइट शिफ्ट को लेकर भी नियम
सरकार ने महिला कर्मचारियों के लिए भी नई व्यवस्था में विशेष प्रावधान किए हैं. उनकी सहमति के आधार पर उन्हें सभी तरह के प्रतिष्ठानों में काम करने का अवसर दिया जाएगा. महिलाएं सुरक्षा संबंधी जरूरी इंतजामों के साथ नाइट शिफ्ट में भी काम कर सकेंगी. सरकार ने इस दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियम तय किए हैं.
ठेका और प्रवासी श्रमिक भी नियमों के दायरे में
नई नियमावली में अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और कल्याण से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं. ठेका और संविदा श्रमिकों के नियोजन को नियमों के दायरे में लाकर जवाबदेही बढ़ाने की व्यवस्था की गई है. साथ ही पंजीकरण, लाइसेंस, रिकॉर्ड और विवरणियां ऑनलाइन जमा करने का प्रावधान रखा गया है. सरकार का कहना है कि नई नियमावली से प्रदेश के निजी क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के अधिकारों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्यस्थल की सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
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प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था में क्या बदलेगा?
- जिन प्रतिष्ठानों में 10 या उससे ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां नियोक्ता को हर श्रमिक को लिखित नियुक्ति पत्र देना होगा.
- घरेलू कामगारों और कृषि क्षेत्र में लगे श्रमिकों को फिलहाल इस अनिवार्यता से बाहर रखा गया है.
- कर्मचारियों की सेहत की नियमित निगरानी के लिए साल में कम से कम एक बार नियोक्ता के खर्च पर स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा.
- कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े खतरों की पहचान कर उन्हें कम करने के लिए जरूरी इंतजाम करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी.
- कर्मचारियों के लिए साफ-सुथरे और पर्याप्त मात्रा में पीने के पानी की व्यवस्था करनी होगी.
- कार्यस्थल पर महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए अलग-अलग जरूरत के मुताबिक शौचालय और स्नान की सुविधा उपलब्ध करानी होगी.
- कर्मचारियों को काम के दौरान आराम करने के लिए रेस्ट रूम की व्यवस्था करनी होगी.
- निर्धारित श्रेणी के बड़े प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिए कैंटीन की सुविधा देना अनिवार्य होगा.
- किसी दुर्घटना या अचानक स्वास्थ्य खराब होने की स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था कार्यस्थल पर मौजूद रहनी चाहिए.
- कर्मचारियों के कार्य घंटे, साप्ताहिक छुट्टी और काम के बीच मिलने वाले आराम का समय तय नियमों के मुताबिक निर्धारित किया जाएगा.
- महिला कर्मचारियों को उनकी सहमति के आधार पर विभिन्न प्रकार के प्रतिष्ठानों में काम करने का अधिकार मिलेगा.
- पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ महिलाएं अपनी इच्छा के अनुसार नाइट शिफ्ट में भी काम कर सकेंगी.
- दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और उनके कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे.
- ठेका और संविदा कर्मचारियों को भी नियोजन से जुड़े नियमों के दायरे में लाकर नियोक्ताओं की जिम्मेदारी तय की जाएगी.
- प्रतिष्ठान की मुख्य गतिविधि से जुड़े कामों में संविदा श्रमिकों की तैनाती पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है.
- रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, रिकॉर्ड और जरूरी विवरण ऑनलाइन जमा किए जाने से श्रमिकों से जुड़े दस्तावेजों में पारदर्शिता और निगरानी बेहतर होगी.
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