UP By-election on 10 Seats: उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 जुलाई को प्रभारी मंत्रियों से मुलाकात कर उनके क्षेत्र का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने हर एक ग्रुप से अलग-अलग मुलाकात की और प्रत्येक ग्रुप को निर्देश दिया कि प्रभारी अपने क्षेत्र में प्रत्येक हफ्ते दो दिन रात्रि विश्राम करें, जब तक कि चुनाव समाप्त न हो जाए। मुख्यमंत्री की तरफ से सभी प्रभारी मंत्रियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि हर एक ग्रुप को कार्यकर्ताओं के साथ बात करनी है और सबसे ज्यादा फोकस बूथ मजबूत करने में लगाना है।
प्रभारियों के साथ बैठक में कहा गया कि विधानसभा उपचुनाव के लिए ईमानदार और जिताऊ प्रत्याशी का ही चयन किया जाए। साथ ही इस पर भी चर्चा हुई कि उपचुनाव वाले क्षेत्रों में जातिगत समीकरण क्या है। विपक्षी दल के प्रत्याशी कौन हो सकते हैं और उनका जनाधार क्या है। सबसे महत्वपूर्ण चर्चा यह रही कि क्या मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा में मुस्लिम प्रत्याशी उतार सकते हैं, तो फिर उसका क्या असर होगा। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि मौजूदा समय कि स्थितियां क्या हैं? अखिलेश यादव के सामाजिक समीकरण पीडीए का अभी कितना असर है।
नहीं चलेगा योगी का बुलडोजर
लखनऊ के पंतनगर में अब बुलडोजर नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद बुलडोजर की कार्यवाही रोक दी गई है। हालांकि पंतनगर के घरों पर अब भी लाल निशान मौजूद हैं। लोगों ने राहत की सांस तो ली है लेकिन भय को चेहरे पर साफ पढ़ा जा सकता है। कुकरैल रिवर फ्रंट के दायरे से 50 मीटर अंदर तक लोगों के घरों पर लाल निशान लगे हैं। ये निशान सिंचाई विभाग के अफसरों ने लगाया है। यहां रहने वाली अनम और सोनी नाम की लड़कियों ने बताया कि वे क्लास 5 और 6 की छात्रा हैं। अपने घर को बचाने के लिए उन्होंने भी आंदोलन में हिस्सा लिया। अनम और सोनी का कहना है कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुमराह किया।
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पंतनगर में ही तनवीर और जफर भी रहते हैं, दोनों युवाओं का सवाल था कि आखिर सालों पुरानी इस कॉलोनी में बुलडोजर चलाने की जरूरत क्यों आई? क्या यहां इंसान नही रहते हैं? जिस वक्त प्रशासन ने घरों पर लाल निशान लगाए थे, उस वक्त स्थानीय लोगों ने अपने घरों पर पोस्टर लगाए थे कि अगर ये घर अवैध है तो वैध क्या है। स्थानीय लोगों ने अपने घरों पर रजिस्ट्री और बिजली का बिल सब कुछ मकान पर चस्पां कर दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब पोस्टर फाड़ दिए गए हैं।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि वे अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि लिखित ऑर्डर की कॉपी नहीं दी गई है। लिहाजा मन में शंका है। लाल निशान के खिलाफ सबसे पहले आंदोलन शुरू करने वाली शिल्पी सिंह ने सीएम का धन्यवाद करते हुए कहा कि कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। लेकिन लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार राहत मिली है। इसके लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद।
संयुक्त समिति के अध्यक्ष और सीएम से मिलने वाले राकेश मणि पांडे ने कहा कि 50 मीटर की दूरी पर लाल निशान और कार्यवाही की बात थी, बाद में मुख्यमंत्री ने इसे 35 मीटर तक कर दिया।
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