'बगल में लाश, सिर में चोट, पैर में फ्रैक्चर', Chamoli Avalanche में जिंदा बचे शख्स की खौफनाक आपबीती

Uttarakhand Chamoli Avalanche Horrible Story: उत्तराखंड के चमोली जिले में एवलांच से जिंदा बचे लाेगों ने हादसे की आंखोंदेखी आपबीती सुनाई है, जो काफी चौंकाने और डराने वाली है। करीब 50 लोग जिंदा बचाए गए हैं, जिनके लिए 60 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था।

Uttarakhand Chamoli Avalanche

60 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बचाई गई 50 जानें।

Chamoli Avalanche Survivor Horrible Story: उत्तराखंड के चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र माना गांव के पास 28 फरवरी की सुबह हिमस्खलन (Avalanche) हुआ था। ग्लेशियर टूटने से आए बर्फीले तूफान से बर्फ में सीमा सड़क संगठन (BRO) से बड़ा हादसा हो गया है। बताया जा रहा है कि इस हादसे में 58 मजदूर दब गए थे, जिनमें से 50 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया, लेकिन 8 मजदूरों की जान चली गई।

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करीब 60 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चला। इस दौरान बचाए गए मजदूरों ने अपनी आपबीती सुनाई तो रौंगटे खड़े हो गए। एक मजदूर जगबीर सिंह करीब 25 घंटे बर्फ में दबा रहा और जिंदा रहा। उसने रेस्क्यू किए जाने के बाद बताया कि जब आंख खुली तो उसने क्या मंजर देखा और कैसे वह एक खोखे में छुपकर और बर्फ खाकर जिंदा रहा।

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करीब 25 घंटे कड़ाके की ठंड में बिताए

अमृतसर निवासी जगबीर सिंह ने बताया कि जब वह होश में आया तो चारों ओर सफेद चादर थी। उसने बगल में अपने सहकर्मी की लाश देखी तो वह सहम गया। उसका शरीर बर्फ के ढेर में फंसा हुआ था। उसके एक पैर में फ्रैक्चर था और सिर पर चोट लगी थी। जहां वह फंसा था, वहां कुछ दूरी पर एक खोखा था, जहां वह रेंगकर पहुंचा और वहां करीब 25 घंटे बिताए।

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प्यास लगने पर बर्फ खाई और कड़ाके की ठंड से जूझता रहा। उसके पास सिर्फ एक कंबल था, जिसे आस-पास पनाह लिए लोग भी शेयर कर रहे थे। शुक्रवार की सुबह उत्तराखंड के चमोली जिले के ऊंचाई वाले गांव माना में बने शिविर में अपने कंटेनर में सो रहे थे कि हिमस्खलन हो गया और वे बर्फीले तूफान के कारण कई सौ मीटर नीचे गिर गए।

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3 से 4 फीट बर्फ में दबे थे सभी मजदूर

ज्योतिर्मठ के सैन्य अस्पताल में लाए गए हिमस्खलन पीड़ितों ने भी आपबीती सुनाई। उत्तरकाशी के मनोज भंडारी ने बताया कि तूफान इतना भयंकर था कि उसने कंटेनरों को सिर्फ 10 सेकंड में 300 मीटर नीचे लुढ़का दिया। कुछ देर के लिए बेहोश हो गया, फिर अहसास हुआ कि भागना असंभव है, क्योंकि चारों ओर 3-4 फीट बर्फ थी। किसी तरह बर्फ में नंगे पैर चलकर सेना के खाली गेस्ट हाउस में शरण लेने पहुंचे। बचाव दल 2-3 घंटे बाद आया।

वहीं बिहार के वैशाली जिले के मुन्ना प्रसाद ने बताया कि सभी कंटेनर लुढ़ककर अलकनंदा नदी की ओर चले गए थे। करीब 12 घंटे तक बर्फ में दबे रहे। बर्फ नथुने बंद कर रही थी और सांस लेना मुश्किल हो रहा था। बिहार के अविनाश कुमार ने बताया कि उनका पूरा शरीर बर्फ में दब गया था। उनके सिर से खून बह रहा था। 2 घंटे बाद सेना के जवानों ने बचाया। उनके सिर में 29 टांके लगे।

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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के रहने वाले चंद्रभान, हिमाचल प्रदेश के विपिन कुमार, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी गणेश कुमार, मुरादाबाद के विजयपाल ने भी आपबीती सुनाई।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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