हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Gyanesh KumarsirBigg Boss 20

कैसे भिखारी से 'पीर' बन गया छांगुर बाबा? असल में पीर कौन होते हैं और उनको ये उपाधि कब मिलती है

Chhangur Baba: यूपी में छांगुर बाबा के काले कारनामों का कच्चा-चिट्ठा जांच के साथ खुलता जा रहा है। छांगुर बाबा की संपत्ति पर तो बाबा का बुलडोजर चल गया। अभी इस केस में नए नाम सामने आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। छांगुर बाबा पहले एक भिखारी था जो बाद में एक पीर बन गया। आपको बताएंगे असल में पीर कौन हैं?

विज्ञापन
Photo Credit- Social Media

Chhangur Baba: उत्तर प्रदेश के छांगुर बाबा का नाम सुर्खियों में है। खुद को पीर बाबा बताने वाला जमालुद्दीन (छांगुर बाबा) नाम का ये शख्स कई सालों से लोगों का धर्मांतरण करा रहा था। इसका खुलासा एक शिकायत के बाद हुआ। छांगुर बाबा के बारे में पता किया तो सामने आया कि वह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। उसने शुरू में भीख मांकर अपना घर चलाया। कुछ समय तक मुंबई में रहने के बाद वह पीर बन कर अपने गांव (रेहरा माफी) आया। लोग पीर बाबाओं के बारे में तो जानते हैं, लेकिन ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जिनको ये पता होता है कि सही में पीर बाबा कौन होते हैं। क्या छांगुर बाबा के जैसे लोग भी पीर बाबा बन सकते हैं?

छांगुर बाबा मुंबई जाकर बना ‘पीर’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छांगुर बाबा के शुरुआती दिन काफी मुश्किल भरे थे। फिर वह अपना गांव छोड़कर मुंबई चला गाया। वहां पर उसने लोगों को बताया कि वह एक पीर है। खुद को पीर बताने वाले बाबा से लोग जुड़ने लगे। नवीन रोहरा (जमालुद्दीन) और उनकी पत्नी नीतू रोहरा (नसरीन) भी इसी दौरान मुंबई में बाबा से मिले और पूरे परिवार के साथ अपना धर्म बदल लिया था।

ये भी पढ़ें: Uttar Pradesh: छांगुर बाबा ने कैसे खड़ा किया अपना नेटवर्क? अब अफसरों पर एक्शन की तैयारी

विज्ञापन

गांव में लोगों से मिलने के लिए बनाई जगह

मुंबई से वापस आने के बाद बाबा ने गांव में प्रधान का चुनाव दो बार जीता। इसके बाद वहीं पर उसने अपने मुरीदों से मिलने के लिए एक दरगाह के पास ही जगह बना ली। जहां पर बाबा से मिलने के लिए लोग दूर-दूर से आने लगे।

कौन होते हैं सही मायनों में पीर?

इसके बारे में हमने एक इस्लामिक जानकार MD. हम्माद से बात की। उन्होंने बताया कि ‘पीर या एक मुर्शिदे कामिल होने के लिए चार शर्तें हैं, तभी उसके हाथों पर बैत करना सही होगा। पहली यह कि वो सुन्नी सहीहुल अकीदा हो। दूसरी शर्त यह है कि उसे जरुरी मजहबी इल्म यानी धार्मिक ज्ञान होना चाहिए, क्योंकि बेइल्म खुदा को पहचान नहीं सकता।’

विज्ञापन

‘तीसरी शर्त यह है कि वह गुनाहे कबीरा यानी बड़े गुनाहों से दूरी बनाए रखे। चौथी शर्त यह है कि उसे सही सिलसिले की इजाजत हासिल हो। जिस शख्स में इनमें से कोई खूबी न हो, उसे न तो उससे मुरीद होना चाहिए और न ही वह पीर बन सकता है।’

वर्तमान में कुछ मजारें हैं जहां पर हर समुदाय के लोग जाते हैं। इन मजारों में मुस्लिम समुदाय के ऐसे लोगों को दफनाया गया होता है जो अपने जमाने में लोगों को शांति के रास्ते पर चलने की सलाह देते थे।

विज्ञापन

छांगुर बाबा कैसे बना पीर?

आजकल अधिकांश लोगों ने ‘पीरी मुरीदी’ के अहम मनसब (ओहदा) को भी केवल दुनिया के फायदे का जरिया बना लिया है। छांगुर बाबा की तरह ही कई लोग खुद को पीर बताकर लोगों को गुमराह करते हैं। इसलिए मुरीद बनते समय मुर्शिदे कामिल की सही पहचान और मुरीद होने के मकसद को ध्यान में रखना जरूरी है। कई बाबा लोगों की परेशानी और भावनाओं को निशाना बनाकर उनके पीर बन जाते हैं।

ये भी पढ़ें: छांगुर बाबा के बाद यूपी में एक और गिरफ्तारी, अवैध धर्मांतरण मामले में पकड़ा गया मोहम्मद ताज कौन है?

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shabnaz

शबनाज़ खानम एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो वर्तमान में न्यूज़24 में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने इंडिया डेली लाइव, ज़ी न्यूज़ सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में विभिन्न पदों पर ज़िम्मेदारियां निभाई हैं। शबनाज़ ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। उन्हें डिजिटल और टीवी दोनों में काम करने का 5 साल का अनुभव प्राप्त है और वे अपने संपादन कौशल, बारीक नज़र और विस्तृत कहानी को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। काम के अलावा, उन्हें सिनेमा और लाइफस्टाइल पर बातचीत करना बेहद पसंद है, जो उनकी कहानी कहने की गहरी रुचि को दर्शाता है।
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola