यूपी में अब खुली मिठाइयों पर भी लिखना होगा 'यूज बाय डेट', त्योहारों से पहले खाद्य विभाग का अहम फरमान जारी

Uttar Pradesh News: अक्तूबर और नवंबर का महीना फेस्टिव सीजन का होता है, इस दौरान मिठाइयों का इस्तेमाल काफी ज्यादा किया जाता है. त्योहारों का वक्त आने से पहले यूपी के फूड डिपार्टमेंट ने मिठाइयों की सेल को लेकर नया और अहम नियम लागू कर दिया है, जिससे ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ न हो पाए.

Sweets PTI

खुली मिठाइयों पर भी सख्त नियम (Photo-PTI)

‘Use By Date’ Mandatory For Sweets In UP: यूपी फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) ने राज्य भर में बेची जाने वाली मिठाइयों पर साफ तौर पर दिखने वाली ‘Use By Date’ लिखना जरूरी कर दिया है. अधिकारियों ने रविवार, 27 सितंबर 2026 को बताया कि ये नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा. ये नियम खासकर खुली मिठाइयों के लिए अहम है, क्योंकि पहले उनकी एक्सपायरी डेट दिखाने की कोई खास जरूरी शर्त नहीं थी. माना जा रहा है कि ये फैसला आने वाले फेस्टिव सीजन के मद्देनजर लिया गया है.

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ये नियम क्यों लाया गया?

खाद्य विभाग के मुताबिक मिठाई बनाने वाली यूनिट्स और रिटेल दुकानों की जांच में पाया गया कि ग्राहकों को अक्सर ये पूरी जानकारी नहीं मिलती थी कि मिठाइयां कब बनी थीं या वो कितने दिनों तक खाने लायक रहेंगी. FSDA कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब के जारी आदेश में कहा गया है कि मिठाइयों की शेल्फ-लाइफ उनमें यूज होने वाली चीजों और उनके टाइप पर डिपेंड करती है. अलग-अलग तरह की मिठाइयां एक दिन से लेकर 30 दिन तक खाने लायक रह सकती हैं.

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डिपार्टमेंट ने कहा कि ‘Use By Date’ दिखाने से ग्राहकों को मिठाई खरीदने से पहले उसकी ताजगी और शेल्फ-लाइफ का पता लगाने में मदद मिलेगी. हालांकि पैक्ड मिठाइयों पर मौजूदा नियमों के तहत पहले से ही एक्सपायरी या ‘यूज बाय डेट’ की जानकारी होती है, लेकिन खुली मिठाइयों के लिए यह नियम साफ तौर पर लागू नहीं था.

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मिल्क यूनिट्स में कुछ केमिकल्स पर रोक

यूपी के FSDA ने राजभर भर में दूध और दूध से बने उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट्स में एथिलीन ग्लाइकॉल और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी है. अधिकारियों ने पाया कि कुछ यूनिट्स पाश्चराइजेशन और रेफ्रिजरेशन जैसी प्रक्रियाओं के दौरान कूलेंट के तौर पर इन केमिकल्स का इस्तेमाल कर रही थीं.

डिपार्टमेंट ने कहा कि अगर प्रोसेसिंग इक्विपमेंट में लीकेज के कारण ये दोनों पदार्थ गलती से दूध में मिल जाएं तो इनसे सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है. इसके ऑप्शन के तौर पर, प्रोसेसिंग यूनिट्स को प्रोपलीन ग्लाइकॉल इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, जिसका इस्तेमाल पहले से ही कई मिल्क-प्रोसेसिंग यूनिट्स कर रही हैं. FSDA ने कहा कि इन उपायों का मकसद खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और ये एनश्योर करना है कि ग्राहकों को उनके खरीदे गए प्रोडक्ट्स के बारे में जरूरी जानकारी मिले.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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