UP का नया सियासी फॉर्मूला! क्या 'BSP कार्ड' से सपा-कांग्रेस पर दबाव बना रहे ओवैसी?

कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं दिख रही. कांग्रेस का कहना है कि वह किसी दबाव की राजनीति नहीं करती और उसका फोकस INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर है. (मानस श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नया समीकरण चर्चा में है. एक तरफ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार मुस्लिम बहुल इलाकों में रैलियां कर रहे हैं तो दूसरी तरफ उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बसपा के साथ गठबंधन के लिए खुले तौर पर तैयार होने की बात कह दी है. सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ मायावती के लिए दोस्ती का संदेश है या फिर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति. क्या दलित और मुस्लिम वोटों की नई केमिस्ट्री यूपी की राजनीति बदल सकती है या यह सिर्फ सियासी संदेश भर है.

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सहारनपुर से शुरू हुआ AIMIM का शक्ति प्रदर्शन अब बहराइच से सहारनपुर तक पहुंच चुका है. मुस्लिम बहुल इलाकों में लगातार रैलियों के जरिए ओवैसी अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. शुरुआत बहराइच से की जहां पर समाजवादी पार्टी का दबदबा है और वहां से होते हुए सहारनपुर आए, जहां कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद को सबसे मजबूत नेता माना जाता है लेकिन सहारनपुर की जमीन से अपनी सियासी ताकत दिखाकर असदुद्दीन ओवैसी ने मुसलमानो के बीच एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की.

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अब ओवैसी ने 25 जुलाई को मुरादाबाद के जामा मस्जिद मैदान में होने वाली जनसभा को लेकर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है. तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने दावा किया कि भीड़ इतनी होगी कि मौजूदा मैदान छोटा पड़ जाएगा. ऐसे में मंच को पीछे खिसकाया जा रहा है. साफ है कि AIMIM 2027 की लड़ाई को लेकर अब सड़क से लेकर मैदान तक सक्रिय नजर आ रही है. रैलियों के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब आया जब शौकत अली ने कहा कि अगर बहुजन समाज पार्टी चाहे तो AIMIM गठबंधन के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी खेमे में सीटों और सामाजिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. हालांकि, अब तक बसपा की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

यूपी का सामाजिक गणित

  • मुस्लिम आबादी करीब 19-20 फीसदी
  • अनुसूचित जाति करीब 21 फीसदी
  • यादव करीब 9 से 10 फीसदी
  • अन्य ओबीसी सबसे बड़ा वर्ग
  • सवर्ण करीब 18 से 20 फीसदी

कांग्रेस-सपा नहीं दे रही तवज्जो
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं दिख रही. कांग्रेस का कहना है कि वह किसी दबाव की राजनीति नहीं करती और उसका फोकस INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर है. पार्टी नेताओं का दावा है कि जनता भाजपा के खिलाफ मजबूत विकल्प चाहती है. समाजवादी पार्टी भी ओवैसी की सक्रियता को गंभीर चुनौती मानने से इनकार कर रही है. सपा का आरोप है कि AIMIM का मकसद सिर्फ विपक्षी वोटों का बंटवारा करना है. पार्टी का कहना है कि उसका PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का सामाजिक गठजोड़ पहले से मजबूत है और ओवैसी की राजनीति से उसके जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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उधर, भाजपा विपक्ष के इन नए समीकरणों पर तंज कस रही है. भाजपा का कहना है कि कौन किसके साथ गठबंधन करता है, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता. पार्टी का दावा है कि 2027 में भी उत्तर प्रदेश में सरकार भाजपा की ही बनेगी.

फिलहाल ओवैसी का बसपा को दिया गया गठबंधन का प्रस्ताव सिर्फ एक बयान है. बसपा ने इस पर कोई संकेत नहीं दिया है. लेकिन इतना तय है कि 2027 से पहले यूपी की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की नई चर्चा शुरू हो चुकी है. अब नजर इस बात पर होगी कि क्या यह प्रस्ताव सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार साबित होगा या फिर चुनावी मैदान में कोई नया गठबंधन आकार लेगा.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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