उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के मतदान केंद्र घट गए हैं. चुनाव आयोग ने बूथों के पुनर्गठन को मंजूरी दी है. जिसके बाद यूपी के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के 3,786 मतदान स्थल घट गए हैं. प्रदेश में मतदान केंद्र 1,77,516 से घटकर 1,73,730 हो गए हैं, यानी कि कुल 3,786 बूथ कम हुए हैं. अब 2027 के चुनाव में घटे हुए 1,73,730 मतदान केंद्रों पर ही वोटिंग होगी. वोटर लिस्ट भी इसी के हिसाब से संशोधित की जाएगी. पोलिंग बूथ घटने से जिन मतदाताओं के बूथ बदल गए हैं, उन्हें BLO लिखित रूप में नए मतदान स्थल की जानकारी देंगे. चुनाव आयोग ने ये भी निर्देश दिए हैं कि एक परिवार के सभी सदस्यों के नाम एक ही वोटर लिस्ट में हों, जरूरत पड़ने पर फॉर्म-8 से संशोधन किया जाएगा.
चुनाव बूथों के पुनर्गठन को मंजूरी
पीटीआई भाषा के मुताबिक, सभी 75 जिलों में प्रत्येक मतदान केंद्र पर 1,200 वोटर्स के निर्धारित मानक के आधार पर यह बदलाव हुआ है. यह प्रक्रिया 16 अक्टूबर को शुरू हुई थी और जिलों से मिले प्रस्ताव मंजूरी के लिए चुनाव आयोग को भेजे गए थे.मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि एक जनवरी, 2027 की कट-ऑफ डेट के आधार पर जारी स्पेशल समरी रिव्यू 2027 के तहत वोटर लिस्ट का मसौदा अब मंजूर किए गए 1,73,730 मतदान केंद्रों पर प्रकाशित किया जाएगा.
BLO देंगे बदले गए मतदान केंद्रों की जानकारी
चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को संशोधित मतदान केंद्रों पर बीएलओ की तैनाती करनी होगी. जिन मतदाताओं के मतदान केंद्र बदले गए हैं, उन्हें संबंधित बीएलओ लिखित सूचना देंगे. बीएलओ के पर्यवेक्षक इस प्रक्रिया पर लगातार नजर रखेंगे, काति येठीक से संपन्न हो सके. वहीं, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी व्यवस्थाओं की जांच करेंगे.
परिवार के सभी सदस्यों के नाम एक लिस्ट में होंगे दर्ज
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बीएलओ को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि एक परिवार के सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची के एक ही भाग में दर्ज हों. अगर मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज पाए जाते हैं, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फॉर्म-8 के माध्यम से जरूरी सुधार किए जाने चाहिए.
पहले देनी होगी बदले हुए मतदान केंद्रों की जानकारी
जिला निर्वाचन अधिकारियों और ईआरओ को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मंजूर किए गए मतदान केंद्रों की सूची उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है.निर्वाचन अधिकारियों को इन बदलावों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया है, ताकि मतदाताओं को उनके नए या बदले गए मतदान केंद्रों की जानकारी पहले से मिल जाए और मतदान के दौरान उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.