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Umesh Pal Murder Case: अब खुलेंगे राज; बरेली जेल में अशरफ की प्रहरी और सब्जी सप्लायर ने कराई थी मीटिंग, दोनों गिरफ्तार

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Umesh Pal Murder Case: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज (Prayagraj) में हुए उमेश पाल हत्याकांड (Umesh Pal Murder Case) में पुलिस के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद के भाई विधायक अशरफ और उसके करीबी सहयोगियों के बीच बरेली जिला जेल में अवैध रूप से मुलाकात कराने के आरोप में पुलिस ने एक जेल प्रहरी और एक सब्जी विक्रेता को गिरफ्तार किया है।

एक जेल प्रहरी तो दूसरा कैंटीन में सब्जी सप्लायर

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जेल प्रहरी शिवहरि अवस्थी और जेल कैंटीन में सब्जियां सप्लाई करने वाले दयाराम के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और 3,920 रुपये बरामद किए हैं।

2020 से बरेली जेल में बंद है अशरफ

पुलिस ने बताया कि अशरफ जुलाई 2020 से बरेली जिला जेल में बंद है। वर्तमान में गुजरात की जेल में बंद अतीक अहमद 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है। अतीक और अशरफ पर हाल ही में इस हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या को लेकर भी मुकदमा दर्ज किया गया है।

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अशरफ के खिलाफ 52 मुकदमे दर्ज हैं

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अशरफ के खिलाफ 52 मुकदमे दर्ज हैं। 2005 के राजू पाल हत्याकांड में सीबीआई की ओर से चार्जशीट भी पेश की गई थी। उन्होंने कहा कि हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या उमेश पाल को खत्म करने की योजना बरेली जेल में बनाई गई थी।

यह भी पढ़ेंः सपा नेता रामगोपाल यादव का बड़ा बयान, बोले- पुलिस अतीक अहमद के बेटे को मार देगी

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इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी ने एक मीडिया रिपोर्ट में बताया कि जेल पुलिस चौकी प्रभारी अनिल कुमार की शिकायत के आधार पर खालिद अजीम उर्फ अशरफ, उसके साले सद्दाम, लल्ला गद्दी, दयाराम और शिवहरि अवस्थी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

एक ही आईडी पर कराई 6-7 लोगों की बैठक

भाटी ने कहा कि आरोप है, दयाराम अपने टेम्पो से जेल कैंटीन में सब्जियां और अन्य सामान सप्लाई करते समय कैश (नगदी) और अन्य सामान ले जाता था। जहां उसे अशरफ को देता था। एएसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि शिवहरि अवस्थी अपने अधिकारियों के आदेश पर जेल के अंदर निर्धारित क्षेत्र के अलावा अन्य जगहों पर सप्ताह में दो या तीन बार एक ही आईडी पर छह-सात लोगों की बैठक करवाता था।

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एएसपी ने यह भी बताया कि अशरफ, उसके रिश्तेदारों और सहयोगियों के बीच बैठक एक-दो घंटे तक चलती थी। शिकायत के अनुसार शिवहरि अवस्थी इसकी व्यवस्था करने के लिए पैसे लेता था।

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