Tungnath Temple Sinking: उत्तराखंड के जोशीमठ में भूमि धंसाव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला रुद्रप्रयाग के तुंगनाथ मंदिर का है। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि किन्हीं कारणों से तुंगनाथ मंदिर 4 से 5 डिग्री तक झुक गया है। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
12,800 फीट की ऊंचाई पर है मंदिर
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर मुखी ये मंदिर गढ़वाल हिमालय के रुद्रप्रयाग जिले में 12,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। एएसआई के अधिकारियों ने इस मंदिर की ताजा स्थिति के बारे में केंद्र सरकार को अवगत कराया है। साथ ही केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि इसे संरक्षित स्मारक के रूप में शामिल किया जाए।
मंदिर के झुकने की समस्या को गंभीरता से लेते हुए एएसआई ने कहा है कि तत्काल कार्रवाई के रूप में क्षति के मूल कारण का पता लगाएगा, जिससे इसकी तुरंत मरम्मत की जा सकती है। फिलहाल अधिकारी मंदिर को हुए नुकसान के पीछे जमीन धंसने के कारण की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं।
मंदिर को तत्काल ठीक करने का प्रयास
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एएसआई के देहरादून सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार सक्सेना ने कहा कि वे पहले मंदिर को हुई क्षति के मूल कारणों का पता लगाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद इसे तत्काल ठीक करने का प्रयास करेंगे। साथ ही वे मंदिर का गहन निरीक्षण करने के बाद एक विस्तृत कार्य योजना पर भी काम करेंगे।
मंदिर की दीवारों पर लगाए डिवाइस
कथित तौर पर एएसआई के अधिकारियों ने धंसने की संभावना से इनकार नहीं किया है, जिसके कारण मंदिर के अलाइनमेंट में बदलाव हो सकता है। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे विशेषज्ञों से परामर्श के बाद क्षतिग्रस्त शिलाओं को बदलने का प्रयास करेंगे। अब एजेंसी ने मुख्य मंदिर की दीवारों पर विशेष डिवाइस लगाए हैं, जो यहां होने वाली हलचल को मापेंगे। दावा किया जाता है कि तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है, जो बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) प्रशासन के अधीन है।
तुंगनाथ महादेव की ये है कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुंगनाथ मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में हुई हत्याओं को लेकर भगवान शिव पांडवों से नाराज हो गए। उधर पांडवों ने भगवान शिव से माफी मांगने से उन्हें काशी से लेकर केदारनाथ तक ढूंढ़ा, लेकिन वो नहीं मिले।
भगवान शिव एक बैल का रूप लेकर धरती में समाने लगे, जिन्हें भीम ने देख लिया। उन्हें निकालने के लिए भीम ने बैल को पीछे से पकड़ लिया। कहा जाता है कि बैल का पिछला हिस्सा रह गया और बाकी चार हिस्से घरती में समा गए। इन पांचों हिस्सों को पंच केदार कहते हैं, तुंगनाथ तीसरे नंबर के हैं।
संबंधित खबरें
राम मंदिर दान चोरी का किसने किया था पर्दाफाश? चंपत राय को लेकर बड़ा खुलासा, जानें 73000 पेज की चार्जशीट में क्या-क्या
10 mins agoUP चुनाव से पहले सीट शेयरिंग पर पेंच, कांग्रेस ने मांगी 200 सीटें तो अखिलेश बोले- 'बात जीत की है'
11 hrs agoजनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री धामी
13 hrs agoसीएम धामी ने की जनहित से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घोषणाएं, बनबसा-टनकपुर क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
14 hrs agoसीएम पुष्कर सिंह धामी की बनबसा में पहली बार कैबिनेट बैठक, दर्जनों महत्वपूर्ण निर्णयों पर लगी मुहर
14 hrs agoसीएम पुष्कर सिंह धामी पारंपरिक रंग में रंगे, कलाकारों के साथ थिरके और स्वयं बजाया ढोल
14 hrs ago'संत रविदास नगर कहलाएगा भदोही', CM योगी का ऐलान, जानें नाम बदलने के पीछे की राजनीति
16 hrs agoराज्यसभा चुनाव: BJP उम्मीदवारों का ऐलान, उत्तराखंड से दिनेश आर्य तो बंगाल से कोयल मल्लिक को टिकट
18 hrs agoयोगी सरकार दिवाली पर देगी DA-बोनस का तोहफा, 18 लाख कर्मचारियों-पेंशनरों को होगा फायदा
20 hrs ago'12000 टूरिस्ट, होटल-गेस्ट हाउस फुल और…', जानें उत्तराखंड और हिमाचल घूमने गए पर्यटकों की कैसी है हालत?
21 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines