रेलवे में नौकरी करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी राहत वाली खबर है. अब ड्यूटी के दौरान अगर कोई हादसा होता है, तो इलाज और छुट्टी के लिए भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ेगी. वाराणसी (बनारस) रेल मंडल के डीआरएम आशीष जैन ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे मेंस कांग्रेस (NERMC) की मांग पर संज्ञान लेते हुए इस संबंध में एक कड़ा और स्पष्ट आदेश जारी किया है. नए नियमों के तहत अब निगरानी अधिकारी (Supervising Officer) अपने घायल कर्मचारी को तुरंत IOD (Injury On Duty) फॉर्म उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होंगे. जानिये इस नए आदेश से रेलकर्मियों को क्या-क्या बड़े फायदे मिलेंगे.
क्या है IOD और कैसे मिलेगा लाभ?
रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी घर से ड्यूटी के लिए निकलता है या ड्यूटी खत्म करके वापस घर लौट रहा होता है और उस दौरान कोई हादसा हो जाता है, तो उसे ड्यूटी के दौरान दुर्घटना (Injury On Duty) ही माना जाता है. IOD के तहत मिलने वाले मेडिकल अवकाश (Sick Leave) को कर्मचारी की जमा छुट्टियों (Earned Leave/LAP) में से नहीं काटा जाता है. यानी उसकी पुरानी छुट्टियां सुरक्षित रहती हैं और इलाज के दौरान का पूरा वेतन व सुविधाएं मिलती हैं.
अब गवाहों की जरूरत नहीं:
पहले IOD फॉर्म की प्रक्रिया पूरी करने और हादसे को साबित करने के लिए दो गवाहों (Witnesses) की जरूरत पड़ती थी, जिससे कर्मचारियों को काफी परेशानी होती थी. नए आदेश के तहत अब दो गवाहों वाली शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.
अधिकारियों के लिए सख्त निर्देश, कर्मचारियों को चेतावनी
नए आदेश के मुताबिक, निगरानी अधिकारी घायल रेलकर्मी को IOD फॉर्म देने में कोई टालमटोल या देरी नहीं कर सकेंगे. रेलवे प्रशासन ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हादसे से जुड़ी बिल्कुल सटीक और सही जानकारी दर्ज करें. गलत या झूठी जानकारी देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.