नोएडा एक्सप्रेसवे पर बनने वाले 2 अंडरपास पर लगा ग्रहण, 10 लाख लोगों का इंतजार बढ़ा
Author: Deepti Sharma
Apr 06, 2025 07:07 AM IST
Uttar Pradesh Noida News (जुनेद अख्तर): अथॉरिटी नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर झट्टा के सामने (16.900 किमी चैनल पर) और सुल्तानपुर गांव (6.10 किमी चैनल पर) 2 नए अंडरपास बनाने का ऐलान कर चुका है। जल्द ही टेंडर जारी कर कंपनी का चुनाव कर लिया जाएगा। फिलहाल यह योजना अधर में लटकती दिखाई दे रही है।
सीएम ने किया था शिलान्यास
बता दें, नोएडा अथॉरिटी के टेंडर जारी करने पर दोनों अंडरपास के निर्माण के लिए 5-5 कंपनियां आई थीं। दावा है कि जांच में सभी कंपनियां खारिज हो गई हैं। अब दोनों अंडरपास के लिए दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा, जिसमें एक कंपनी का चयन किया जाएगा। ऐसे में शिलान्यास के बाद अंडरपास के निर्माण में देरी होने की संभावना है। इसका शिलान्यास सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था। वहीं, अंडरपास के निर्माण में देरी के चलते करीब 10 लाख लोगों का भी इंतजार अब और भी बढ़ गया है।
बजट बढ़कर हुआ 215 करोड़
जानकारी के मुताबिक, पहले दोनों अंडरपास का बजट 181 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 215 करोड़ रुपये हो गया है। जिसमें पहला अंडरपास एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-145, 146, 155 और 159 के बीच 16.900 किमी चैनल पर बनेगा। इसकी लंबाई 800 मीटर होगी। इसके निर्माण पर अब करीब 115 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे नव विकसित/विकासाधीन औद्योगिक सेक्टर-151, 153, 154, 155, 156, 157, 158, 159, 162 और 9 गांवों को लाभ मिलेगा।
दूसरे पर खर्च होंगे 100 करोड़ रुपये
दूसरा अंडरपास सुल्तानपुर के पास एक्सप्रेसवे पर 6.10 किमी के चैनल पर सेक्टर-128, 129, 132 और 108 के बीच बनेगा। इसकी लंबाई 731 मीटर होगी। इसके निर्माण पर कुल 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस अंडरपास से सेक्टर-104, 105, 106, 107, 108, 110, 80, 81, 82, 83, 127, 128, 129, 130, 131, 132, 133, 134, 135, फेज-2, एनएसईजेड और 11 गांवों को फायदा होगा।
किस तकनीक से होगा अंडरपास का निर्माण
दोनों अंडरपास का निर्माण डायाफ्राम तकनीक से किया जाएगा। इस बार बनने वाले अंडरपास में तकनीक में बदलाव किया गया है। 2020 के बाद एक्सप्रेसवे पर कोंडली, एडवेंट और सेक्टर-96 अंडरपास बॉक्स पुशिंग तकनीक पर बनाए गए थे। इसमें एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने की समस्या लगातार सामने आ रही थी। इसलिए इस बार अथॉरिटी ने अंडरपास के निर्माण के लिए डायाफ्राम तकनीक का चयन किया है।
कैसे होगा निर्माण
इस तकनीक से बिना खुदाई किए डायाफ्राम दीवार की ढलाई की जाएगी। इसके बाद दोनों तरफ जमीन के अंदर यह दीवार बनाई जाएगी और इस पर अंडरपास की छत डाली जाएगी। दोनों दीवारों और छत के बीच की मिट्टी को खोदकर हटाया जाएगा। इसके बाद नीचे की सड़क का काम शुरू होगा। इसी तरह अथॉरिटी दोनों लेन का काम कराएगा। इसके चलते कुछ दिनों तक ट्रैफिक प्रभावित रहेगा।
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