NIA का मोस्ट वांटेड, 30 लाख का इनामी नक्सली; कौन था बृजेश गंझू? जो वाराणसी में ATS से मुठभेड़ में हुआ ढेर

वाराणसी में यूपी एटीएस और पुलिस की कार्रवाई में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू की मौत हो गई. झारखंड के TPC से जुड़े बृजेश पर झारखंड सरकार और NIA ने इनाम घोषित कर रखा था.

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वाराणसी में UP एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 30 लाख रुपये का इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू ढेर. फोटो- (X @Nation27Digital/ANI)

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूपी एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को मुठभेड़ में मार गिराया गया. यह मुठभेड़ रविवार तड़के रामनगर थाना क्षेत्र में हुई. पुलिस के मुताबिक, बृजेश झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का कमांडर था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं.

माओवादियों से लंबे समय तक चला संघर्ष

बता दें कि साल 2004 में ब्रजेश गंझू ने प्रतिबंधित भाकपा माओवादी से अलग होकर एक समानांतर संगठन खड़ा किया. बाद में इसी संगठन ने तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के रूप में अपनी पहचान बनाई. चतरा से शुरू हुई इसकी गतिविधियां झारखंड के रांची, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू और लातेहार तक पहुंचीं. बिहार के कुछ इलाकों में भी संगठन की सक्रियता दर्ज की गई.

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संगठन की कमान के साथ मुखिया भी बना

ब्रजेश गंझू ने टीएसपीसी में अहम भूमिका निभाते हुए चतरा और आस-पास के क्षेत्रों में संगठन का प्रभाव बढ़ाया. पुलिस के मुताबिक, संगठन माओवादी प्रभाव को चुनौती देने के साथ रंगदारी वसूली जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा. खास बात यह रही कि उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े रहने के बावजूद ब्रजेश 2010 में लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया चुना गया था.

पुलिस को सूचना मिली थी कि बृजेश अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ के रास्ते मुगलसराय की ओर जा रहा है. इसके बाद यूपी एटीएस और रामनगर पुलिस की टीम ने लंका मैदान के पास उसकी घेराबंदी की. पुलिस का कहना है कि टीम ने उसे रुकने का संकेत देकर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह बाइक से उतरकर कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने लगा. इसके बाद दोनों तरफ से फायरिंग हुई, जिसमें बृजेश को गोली लगी.

30 लाख रुपये का था इनाम

मुठभेड़ के दौरान बृजेश की ओर से चलाई गई गोलियां यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं. फिलहाल दोनों पुलिसकर्मी सुरक्षित हैं. गोली लगने के बाद बृजेश को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है. उस पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इसमें झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तरफ से 5 लाख रुपये का इनाम शामिल था. बता दें कि वह TPC के शीर्ष कमांडरों में से एक था.

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NIA भी कर रही थी तलाश

NIA से जुड़े एक मामले में भी बृजेश का नाम सामने आया था. रिपोर्टों के अनुसार, टंडवा से जुड़े मामले में TPC की कथित लेवी वसूली और फंडिंग नेटवर्क की जांच के दौरान उसका नाम आरोपियों में शामिल किया गया था. NIA ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी. वाराणसी में हुई इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि बृजेश किस उद्देश्य से वाराणसी आया था और स्थानीय लोगों में कौन-कौन उसके संपर्क में था. उसके साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति को लेकर भी जांच की जा रही है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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