Uttar Pradesh Police filed FIR against Kafeel Khan: गोरखपुर के डॉ. कफील खान एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। एक व्यापारी ने की शिकायत के बाद लखनऊ में निलंबित गोरखपुर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ कफील खान और पांच अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिन्होंने एक कियोस्क के पीछे बातचीत सुनी थी। शिकायतकर्ता ने डॉ. कफील की किताब का संदर्भ देने और सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए दंगे भड़काने की साजिश का आरोप लगाया है। कथित तौर पर, जब शिकायतकर्ता और उसके दोस्तों ने उन पर विस्फोटकों के साथ आतंकवादी होने का संदेह किया तो कफील का ग्रुप घबरा गया और वहां से भाग गया।
कफील खान पर लगा लोगों को भड़काने का आरोप
मामले में डॉ. कफील पर लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने के लिए एक किताब बांटने का आरोप लगाया गया है, जिसके बाद धोखाधड़ी, जालसाजी, शांति भंग करने के लिए अपमान और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरे का दावा सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने अन्य आरोपियों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है।
कौन है डॉ. कफील खान?
कफील खान एक डॉक्टर, लेखक और बाल रोग विभाग, बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज (बीआरडी मेडिकल कॉलेज), गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के पूर्व लेक्चरर है। खान का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। उसने केएमसी, मणिपाल, कर्नाटक से एमबीबीएस और एमडी (बाल रोग) किया था इसके बागद एसएमआईएमएस, गंगटोक (सिक्किम) में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया है। खान को 8 अगस्त 2016 को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के रूप में स्थायी कमीशन मिला था।
ये भी पढेंः फिल्मी कहानी से कम नहीं है इस शख्स की जिंदगी, पिता के हत्यारों को ऐसे पहुंचाया सलाखों के पीछे
NRC के खिलाफ प्रदर्शन के समय कफील खान गया था जेल
खान पहली बार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आया था। अलीगढ़ में दिए गए एक भाषण के कारण डॉ. कफील खान को सात महीने से अधिक समय तक कारावास की सजा भुगतनी पड़ी थी। इसके बाद कफील खान सबसे ज्यादा चर्चा में तब आया जब कफील खान का नाम 2017 की गोरखपुर त्रासदी में फंस गए, जिसमें 63 बच्चों और 18 वयस्कों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई थी।
यह घटना उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में घटी थी सामने आई जब अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति में गंभीर कमी का अनुभव हुआ। कहा जाता है कि उन्होंने ऑक्सीजन की व्यवस्था की थी। हालांकि, इन आरोपों को कफील खान ने नकार दिया था और कहा कि मौतों से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें ही “बलि का बकरा” बनाया गया।
संबंधित खबरें
अंकिता भंडारी केस: धामी सरकार की संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई
43 mins agoअंकिता भंडारी केस: धामी सरकार की पैरवी, दोषियों को उम्रकैद
2 hrs ago'3 महीने में कराएं चुनाव', यूपी पंचायत इलेक्शन पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
4 hrs agoसीएम योगी बोले- ग्रामीण अर्थव्यवस्था की निर्माता बन रही यूपी की नारी
4 hrs agoइश्क, धोखा और मर्डर…, सौरभ हत्याकांड को साहिल-मुस्कान ने कैसे दिया अंजाम?
5 hrs agoनीले ड्रम वाली मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, सौरभ मर्डर केस में फैसला
6 hrs agoयूपी के शाहजहांपुर में क्या कर रही बांग्लादेश की ट्रेन? देखने को उमड़ी भीड़
9 hrs agoUP में BJP के बड़े नेता को उनके ही फार्महाउस में बनाया बंधक, लूटे 50 लाख
11 hrs agoआजम खान पर ED का एक्शन, सरकारी धन के गबन-धोखाधड़ी के आरोप में FIR दर्ज
11 hrs agoकौन हैं सपा को झटका देने वाले 3 विधायक, BJP के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
12 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines