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तो युवराज को कौन बचा रहा था? नोएडा पुलिस ने कोर्ट में बताया- डिलीवरी ब्वॉय मुनेंद्र की लोकेशन थी कहीं और

नोएडा इंजीनियर मौत मामले में पुलिस की लोकेशन थ्योरी और चश्मदीदों के दावों के बीच पेंच फंस गया है. कोर्ट ने जांच में ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए आरोपियों की हिरासत बढ़ा दी है.

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में पुलिस की रिपोर्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कोर्ट में युवराज और मुनेंद्र के मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की जानकारी दी है. पुलिस का दावा है कि जिस वक्त मुनेंद्र खुद को मौके पर मौजूद बता रहा है, उसकी मोबाइल लोकेशन घटनास्थल से काफी दूर थी. हालांकि, मुनेंद्र और मृतक युवराज के पिता राजकुमार मेहता इस बात को गलत बता रहे हैं. परिजनों का कहना है कि मुनेंद्र हादसे के समय वहीं था और कई लोग इसके गवाह भी हैं. पुलिस ने कंट्रोल रूम को मिली पहली कॉल से लेकर रेस्क्यू टीम के पहुंचने तक की पूरी टाइमलाइन भी कोर्ट के सामने रखी है.

बड़े पदों पर बैठे लोग अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर

अदालत में हुई सुनवाई के दौरान लोटस ग्रीन बिल्डर के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक और एमजेड विजटाउन के डायरेक्टर अभय कुमार की हिरासत 2 फरवरी तक बढ़ा दी गई है. लोटस ग्रीन के वकीलों ने दलील दी कि पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा है, वे कंपनी के मालिक नहीं बल्कि केवल छोटे कर्मचारी हैं. बचाव पक्ष का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन के दबाव में बिना पूरी जांच के इन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वकीलों ने साफ कहा कि असली जिम्मेदार और बड़े पदों पर बैठे लोग अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया है.

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500 पन्नों की तकनीकी रिपोर्ट का खुलासा

बचाव पक्ष ने अदालत में 500 पन्नों की एक बड़ी रिपोर्ट पेश की है, जिसमें सैटेलाइट इमेज और पुराने रिकॉर्ड शामिल हैं. वकीलों का दावा है कि साल 2021 से ही उस नाले की हालत खराब थी और वहां पानी भर रहा था. इस बारे में नोएडा प्राधिकरण को पहले ही जानकारी दे दी गई थी और मरम्मत के लिए पैसा भी मंजूर हुआ था, लेकिन कोई काम नहीं कराया गया. ऐसे में इस हादसे की पूरी जिम्मेदारी केवल प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों पर डालना गलत है. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया और बिना ठोस आधार के रिमांड मांगी गई है.

अदालत ने लगाई फटकार

सुनवाई के दौरान जब जज ने पुलिस के जांच अधिकारी (विवेचक) से पूछा कि क्या उन्होंने कंपनी की रिपोर्ट पढ़ी है, तो अधिकारी ने समय की कमी का बहाना बना दिया. इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और विवेचक को जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि पिछली बार भी पूरी तैयारी के साथ आने को कहा गया था, फिर भी लापरवाही बरती गई. सीजेएम ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर पुलिस को पूरी फाइल, सबूतों और तथ्यों के साथ आना होगा. पुलिस को दो दिन का समय दिया गया है ताकि वह अपनी जांच में आरोपियों की सटीक भूमिका तय कर सके और यह साफ हो सके कि असली लापरवाही किसकी ओर से हुई है.


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