हिमालय की वादियों में सजेगा जड़ी-बूटियों का सबसे बड़ा मेला, 4 से 6 नवंबर तक 'हर्बल कुम्भ'; जानिए क्या-क्या होगा खास
मेले का मुख्य मकसद किसानों को आधुनिक व उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित कराना, हिमालयी फसलों और जड़ी-बूटियों की वैल्यू चेन को मजबूत करना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है.
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण खुद तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं.
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित मालाग्राम में 4 से 6 नवंबर 2026 तक तीन दिन का भव्य ‘हर्बल कुम्भ – जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं धन्वंतरि महोत्सव’ का आयोजन होने जा रहा है. इसका आयोजन पतंजलि से जुड़े ‘हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ द्वारा किया जा रहा है. हिमालय की सुरम्य वादियों में 200 एकड़ में फैला यह परिसर पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और आधुनिक कृषि विज्ञान के समन्वय का वैश्विक केंद्र है.
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इस तीन दिवसीय आयोजन के मुख्य संरक्षक पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव और कुलपति आचार्य बालकृष्ण हैं. इस मेले का मुख्य मकसद किसानों को आधुनिक व उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित कराना, हिमालयी फसलों और जड़ी-बूटियों की वैल्यू चेन को मजबूत करना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है.
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तैयारियों का जायजा लेने निकले आचार्य बालकृष्ण
मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण खुद इन तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं. रात में आचार्य बालकृष्ण खुद तैयारियों का जायजा लेने निकल पड़े.
मेले के मुख्य आकर्षण
इस महाकुंभ में किसानों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए कई विशेष आकर्षण रखे गए हैं. पतंजलि किसान डायरी का विमोचन किया जाएगा. इसके अलावा हाई-वैल्यू फसलों के प्रदर्शन प्लॉट्स होंगे. वहीं, मृदा परीक्षण, मॉडल खेती, मधुमक्खी पालन का सजीव प्रदर्शन और प्रशिक्षण होगा. इसमें ‘पेस्टीगार्ड’ के जरिए व्यापक कीटनाशक विश्लेषण तकनीक और पतंजलि ग्रामोद्योग की गौशाला का स्व-स्थायी मॉडल मुख्य आकर्षण होंगे. इसके अलावा कोकोपीट और कॉयर उद्योग, प्राकृतिक एवं डिजिटल कृषि तकनीकें का भी प्रदर्शन होगा.
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इसके अलावा किसान मंच, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, पारंपरिक व्यंजन, जल संरक्षण मॉडल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी.
पहला दिन, 4 नवंबर 2026
-स्थापना, नवाचार और प्रदर्शनी का शुभारंभ -प्रातःकालीन यज्ञ और पंजीकरण के बाद 10 बजे मेले का विधिवत उद्घाटन -स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का आशीर्वचन एवं पुस्तक विमोचन -उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. धनसिंह रावत और मदन कौशिक का संबोधन -दोपहर में कृषि व हर्बल प्रदर्शनी का शुभारंभ और पहला प्रशिक्षण सत्र -शाम को पतंजलि विश्वविद्यालय एवं माला भजन मंडली द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम
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दूसरा दिन, 5 नवंबर 2026
-प्रातःकालीन दैनिक यज्ञ और अतिथियों का स्वागत -स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के आशीर्वचन -मुख्य अतिथि व कैबिनेट मंत्री भगत सिंह चौधरी का संबोधन -द्वितीय प्रशिक्षण सत्र और प्रदर्शनी का मार्गदर्शन सहित भ्रमण -शाम को स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और भजन मंडली द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
तीसरा दिन, 6 नवंबर 2026
-प्रातः संध्योपासना और दैनिक यज्ञ -स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के आशीर्वचन -कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा का संबोधन -चौथा प्रशिक्षण सत्र और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों व स्टॉलों को पुरस्कार वितरण के साथ मेले का समापन।
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प्रतिभागियों के लिए विशेष सुविधाएं
आयोजकों द्वारा प्रदर्शकों और पंजीकृत किसानों के लिए नि-शुल्क स्टॉल, डॉरमेट्री में नि-शुल्क आवास और तीनों दिन नि-शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है. उत्कृष्ट प्रदर्शनी, बेहतर प्रबंधन और व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए विशेष पुरस्कार भी दिए जाएंगे.