Uttar Pradesh News: भारत की जेलों में जातिवाद का जहर भरा पड़ा है। यहां कैदियों के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है और इस व्यवहार का आधार जाति होती है। जेल में सबसे पहले कैदी की जाति पूछी जाती है। दौलत कुंवर कई बार जेल गए लेकिन हर बार उनके साथ एक जैसा ही व्यवहार हुआ। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक दौलत कुंवर ने बताया कि जेल में कदम रखते ही जातिगत भेदभाव शुरू हो जाता है।
ये सिर्फ दौलत कुंवर का अनुभव नहीं है। यूपी और उत्तराखंड की जेलों में समय बिताने वाले विचाराधीन कैदियों सहित अन्य कैदियों ने भी ऐसी बात कही है। समाज के निचले तबके से ताल्लुक रखने वाले कैदियों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव आएगा। शीर्ष कोर्ट ने तीन अक्टूबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए औपनिवेशिक शासन वाले दौर के जेल मैनुअल को खत्म कर दिया है, जो जेलों में जाति आधारित कार्य विभाजन को मजबूत करता है। ये मैनुअल खास तौर पर हाशिए के समाज को टारगेट करता है।
दौलत कुंवर ने कहा कि अधिकारी सबसे पहले कैदी की जाति पूछते हैं और उसकी पर्सनल डिटेल्स के साथ जाति लिख दी जाती है। फिर इस बात की जानकारी सभी को दे दी जाती है और इसी आधार पर कार्य निर्धारित किए जाते हैं। अगर कोई काम करने से मना करता है तो उसे दूसरे कैदी पीटते हैं और ये सब जेल प्रशासन के निर्देशों पर होता है।
’67 दिन 67 साल जैसा लगा’
हापुड़ के रहने वाले 43 वर्षीय इंदर पाल ने कहा कि मैं 67 दिनों के लिए जेल गया था, लेकिन यह मुझे 67 साल जैसे लगे। इंदर पाल ने कहा कि हम सब अपराधी थे, लेकिन कुछ हमसे ‘श्रेष्ठ’ थे। इंदरपाल ने कहा कि मैंने दो हफ्तों तक सफाई की, फिर जब बीमार पड़ गया और काम नहीं कर सकता था, तो मुझे टॉयलेट साफ करने को कहा गया और वह भी बिना ब्रश के। मुझसे कहा गया कि मैं कपड़े का इस्तेमाल करूं या फिर अपने हाथों से साफ करूं।
23 साल के मोनू कश्यप ने कहा कि जेलों में भेदभाव सिर्फ काम के लेवल पर नहीं है। मोनू कश्यप को अवैध रूप से हथियार रखने के एवज में सात दिनों की सजा हुई थी। मोनू ने कहा कि जेलों में निचली जाति के लोगों के लिए खाने की मात्रा तय थी, लेकिन ऊंची जाति के लोग जितना चाहे उतना खा सकते थे। शिकायत करने पर मारपीट होती थी। 38 वर्षीय राम बहादुर सिंह ने कहा कि यूपी की जेलों में दलित कैदियों को खा लेने के लिए अलग से लाइन लगाने को कहा जाता था। ऐसा लगता था जैसे कि हमें जानवरों की तरह बचा खुचा खाना खिलाया जाता था।
यूपी डीजीपी ने किया कोर्ट के फैसले का स्वागत
उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लंबे समय से प्रतीक्षित न्याय है। इससे जेलों में श्रम की गरिमा को बहाल करने में मदद मिलेगी। सदियों से जाति और व्यवसाय को गलत तरीके से जोड़ा गया है। इससे एक पूरे समुदाय को अधीनता और अपमान का जीवन जीने के लिए बाध्य होना पड़ा। यूपी डीजीपी ने कहा कि अनुच्छेद 21 आधारित इस फैसले के साथ न्यायालय ने जेलों में जाति आधारित श्रम की जंजीरों को समाप्त करने का आह्वान किया है। इससे समानता को बढ़ावा देने वाले सुधारों को बढ़ावा मिलेगा।
कोर्ट के फैसले की तारीफ दलित सामाजिक कार्यकर्ता भी कर रहे हैं। दलित एक्टिविस्ट और मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर सतीश प्रकाश ने कहा कि जेल मैनुअल में बदलाव सिर्फ एक शुरुआत है। असली मुद्दा है लोगों की सोच। जाति आधारित समाज में जेल के अंदर और बाहर दोनों जगह वर्चस्व कायम रहता है। इसलिए सोशल इंजीनियरिंग जरूरी है। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले दलित सामाजिक कार्यकर्ता और वकील किशोर कुमार ने कहा कि जेल वार्डन के लिए दलित शब्द का मतलब है मैला ढोना, झाड़ू लगाना और सफाई का काम करना।
हालांकि कुछ जेल अधिकारियों ने कहा कि उनकी जेलों में जाति आधारित पूर्वाग्रह नहीं है। उत्तराखंड में डीआईजी (जेल) दधिराम मौर्य ने कहा कि हमारी जेलों में जाति आधारित कोई काम नहीं होता है। पिछले नवंबर में नए जेल मैनुअल के साथ इसे बंद कर दिया गया था।
संबंधित खबरें
कौन हैं सपा को झटका देने वाले 3 विधायक, BJP के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
10 mins agoपूजा कर रही मुस्कान, साहिल परेशान... ब्लू ड्रम मर्डर में आज सजा का फैसला
59 mins agoसीएम धामी ने अजीत डोभाल पर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई
14 hrs agoउत्तराखंड में एक साल के लिए गुटखा-पान मसाला बैन, सरकार ने उठाया सख्त कदम
19 hrs agoUP में ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़ा, परिवार को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज
19 hrs agoउत्तर प्रदेश में लीज रजिस्ट्री हुई सस्ती, सरकार ने तय की फीस
23 hrs agoनोएडा का होगा विस्तार, 20 हजार हेक्टेयर में बनेगा ‘न्यू नोएडा’
1 day agoदिल्ली-NCR में छाए रहेंगे बादल, जानें आपके राज्य में कल कैसा रहेगा मौसम
1 day agoCM धामी ने माउंट मुकुट की सफल चढ़ाई के बाद ICG की टीम का किया स्वागत
1 day agoहरिद्वार कुंभ 2027 का लोगो, वेबसाइट और गीत लॉन्च
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines