चमोली में प्रोग्राम कराने पर स्काउट ऑफिसर को DM का नोटिस, जानिए बद्रीनाथ धाम में शंखनाद पर क्यों है पाबंदी

Shri Badrinath Dham: श्री बद्रीनाथ धाम एक पवित्र और शांत तीर्थस्थल है, यहां तेज आवाज में प्रोग्राम करने की मनाही होती है, लेकिन गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु ने बिना जिला मजिस्ट्रेट की इजाजत लिए एक कार्यक्रम कराया जिसमें काफी शोर हो रहा था.

Badrinath Dham PTI

श्री बद्रीनाथ धाम (Photo-PTI)

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Chamoli News: चमोली के डीएम गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु से सफाई मांगी है. ये मामला श्री बद्रीनाथ धाम में जिला प्रशासन की इजाजत के बिना कथित तौर पर एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन से जुड़ा है. 23 सितंबर 2026 के एक नोटिस में जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस प्रोग्राम में काफी भीड़ जुटी थी और पवित्र तीर्थ स्थल पर तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था.

धार्मिक पवित्रता को लेकर चिंता

इस नोटिस के मुताबिक बद्रीनाथ धाम धार्मिक आस्था का एक अ केंद्र है और इसकी आध्यात्मिक पवित्रता और गरिमा बहुत अधिक है. प्रशासन ने पाया कि तीर्थ स्थल पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने से, खासकर जिनमें तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल हो, पवित्र स्थल का माहौल प्रभावित हो सकता है. डीएम ने ये भी कहा कि ऐसी गतिविधियों का मंदिर में होने वाली नियमित धार्मिक रस्मों और प्रार्थना समारोहों पर बुरा असर पड़ सकता है. नोटिस में कहा गया है कि धार्मिक स्थल पर इस तरह के कार्यक्रमों से धार्मिक विद्वानों और श्रद्धालुओं के बीच चिंता पैदा हो सकती है और स्थानीय प्रशासन के इंतजाम पर भी असर पड़ सकता है.

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गढ़वाल स्काउट्स से मांगी सफाई

जिला मजिस्ट्रेट ने कर्नल शांतनु से उन हालात के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है जिनके तहत बद्रीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया और सक्षम प्रशासनिक प्राधिकरण से जरूरी अनुमति क्यों नहीं ली गई.
नोटिस में इस बात पर भी जवाब मांगा गया है कि क्या कार्यक्रम आयोजित करने की इजाजत किसी स्तर पर ली गई थी और अगर हां, तो किन हालात में कार्यक्रम को आयोजित करने की अनुमति दी गई. प्रशासन ने ये भी कहा है कि भविष्य में बद्रीनाथ धाम में उचित मंजूरी के बिना ऐसे कार्यक्रम, खासकर जिनमें तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम या बड़ी भीड़ शामिल हो, दोबारा आयोजित न हों, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएं.

बद्रीनाथ धाम में तेज आवाज और शंखनाद क्यों वर्जित है?

बद्रीनाथ धाम में शंख बजाने की परंपरा नहीं है. धार्मिक मान्यता के अनुसार ये क्षेत्र भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तपस्या से जुड़ा है. इसलिए यहां शांति और ध्यान की परंपरा को बनाए रखने के लिए तेज आवाज से बचा जाता है. इसी मान्यता के चलते शंखनाद भी वर्जित माना जाता है. हालांकि कुछ कार्यक्रम के लिए प्रशासन की तरफ से लिखित आदेश लेना पड़ता है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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