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यूपी की सियासत में ब्राह्मण वोट के क्या मायने? BJP से मिली वार्निंग, कांग्रेस-सपा ने दिया ऑफर

Brahmin vote in Uttar Pradesh politics: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की लामबंदी पर अब पार्टी में ही घमासान शुरू गया है यूपी बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भविष्य में ऐसे किसी भी आयोजन को अनुशासनहीनता मान कर कार्रवाई की चेतावनी दी है, इसके बाद से विपक्षी दलों सपा हो या कांग्रेस ने ब्राह्मण वोट के महत्व को समझते हुए खुलकर ऑफर देने शुरू कर दिए हैं. पढ़ें लखनऊ से मानस श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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Brahmin vote in Uttar Pradesh politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में ब्राह्मण वोट बैंक बेहद महत्वपूर्ण है. इसमें भी शक नहीं की ब्राह्मण वर्ग के मतदाताओं की उत्तर प्रदेश में करीब 10 से 11 फ़ीसदी की भागीदारी है ऐसे में इस बड़े वोट बैंक को अपने पाली में लाने का लालच सभी सियासी दलों को रहता है खासतौर से मायावती के सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग के बाद तो उत्तर प्रदेश की सियासत में ब्राह्मण मतदाताओं का कद इतना ऊंचा हो गया है जिसे सभी सियासी दलों को मजबूर किया कि वह ब्राह्मणों को अपने साथ लेकर चलें. विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी के कुशीनगर से ब्राह्मण विधायक पीएनपाठक के घर पर ब्राह्मण विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के सहभोज की तस्वीर भारतीय जनता पार्टी के लिए ही मुसीबत का सबब बन गई है. अब जबकि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने ही भाजपा विधायकों को यह हिदायत जारी की गई तो उसके बाद तो जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को मौका मिल गया. दोनों प्रमुख विपक्षी दलों ने अपने-अपने स्तर पर ब्राह्मण विधायकों को अपने पक्ष में आने के लिए ऑफर जारी कर दिया.

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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने क्या दिया ऑफर

सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने यह कहना शुरू कर दिया कि जब छत्री जाति के विधायकों ने बैठक की तब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन जैसे ही ब्राह्मण विधायक एकजुट हुए उनको चेतावनी जारी कर दी गई जो इस बात को साबित करती है कि ब्राह्मणों का सम्मान भारतीय जनता पार्टी में नहीं है ऐसे में पिछले दलित और अल्पसंख्यक के साथ ब्राह्मण समाज को समाजवादी पार्टी के साथ आना चाहिए. इधर कांग्रेस पार्टी भी यह दावा कर रही है की सबसे ज्यादा ब्राह्मणों का सम्मान उनकी सरकार में हुआ आजादी के बाद से साल 1989 तक उत्तर प्रदेश के जितने मुख्यमंत्री हुए उसमें से 6 ब्राह्मण जाति के थे और यह सभी कांग्रेस के थे ऐसे में ब्राह्मणों को कांग्रेस के साथ आने पर विचार करना चाहिए

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ब्राह्मण विधायक भाजपा से निराश क्यों

भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश के कल 52 ब्राह्मण विधायकों में से 46 ब्राह्मण विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए बैठक में ब्राह्मण के मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर की थी. बैठक में शामिल विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के अनुसार बैठक में यह माना गया था कि उत्तर प्रदेश का 90 फ़ीसदी ब्राह्मण मतदाता भारतीय जनता पार्टी को खुलकर वोट करता है फिर भी उन्हें सरकार में वह भागीदारी नहीं मिली जिसकी अपेक्षा थी और संगठन में भी उनका वर्चस्व कम हो रहा है. इस बैठक को मानसून सत्र में हुए छत्री विधायकों की बैठक के जवाब से जोड़कर देखा गया हालांकि बैठक में शामिल होने वाले ब्राह्मण विधायक इससे इनकार कर रहे हैं. वहीं, यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने तत्काल इस पर सख्त तेवर दिखाये और बाकायदा पत्र लिखकर भविष्य में इसे न दोहराने की हिदायत दी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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