Assistant Professor In UP Lost His Job: यूपी के एक प्राइवेट कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए हाल के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उन्हें उनकी नौकरी से हटा दिया गया. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में देशभर से लोग शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे, बरेली के टीचर भी उन में से एक थे.
असिस्टेंट प्रोफेसर के आरोप
बरेली के गन्ना उत्पादक पीजी कॉलेज में कॉमर्स के असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे 32 साल के डॉ. मोहित भारद्वाज ने दावा किया कि 20 जुलाई को प्रदर्शन से लौटने के तुरंत बाद उनको नौकरी से निकाल दिया गया. उनके मुताबिक, उन्हें प्रिंसिपल के ऑफिस बुलाया गया, जहां उन्हें बताया गया कि कॉलेज मैनेजमेंट ने उनकी सेवाएं खत्म करने का फैसला किया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये फैसला सुनाने से पहले विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी के वीडियो का हवाला दिया गया.
जंतर-मंतर पर हुआ था प्रदर्शन
दिल्ली के एतिहासिक जंतर-मंतर पर ये विरोध प्रदर्शन कथित पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर चिंताएं जाहिर करने के लिए आयोजित किया गया था. इसमें शामिल लोगों ने देश की एग्जाम सिस्टम में ज्यादा ट्रांसपेरेंसी, जवाबदेही और सुधार की मांग की. जिसके बाद देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया था.
प्रोटेस्ट में क्यों शामिल हुए मोहित?
डॉ. मोहित भारद्वाज ने जोर देकर कहा कि वो अपनी निजी हैसियत से प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उनका मकसद छात्रों के साथ एकजुटता दिखाना था. उन्होंने किसी भी संस्थान के नियमों का उल्लंघन करने से इनकार किया और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए. उनके मुताबिक कॉलेज ने उन्हें बिना कोई कारण बताओ नोटिस दिए या कोई औपचारिक विभागीय जांच किए बिना नौकरी से निकाल दिया.
कॉलेज का जवाब
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने नौकरी से निकाले जाने के फैसले से जुड़ी शिकायतों, जांच के दस्तावेजों और रिकॉर्ड की कॉपी पाने के लिए जिला प्रशासन और कॉलेज अधिकारियों से संपर्क किया है. नौकरी से निकालने वाले लेटर में भारद्वाज के खिलाफ ‘बार-बार शिकायतें’ मिलने का जिक्र था. हालांकि, उन्होंने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि कॉलेज में अपने 2 साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें अपने बिहेवियर या काम को लेकर कभी कोई आधिकारिक शिकायत या चेतावनी नहीं मिली. वहीं कॉलेज मैनेजमेंट ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि संस्थान के अंदर राजनीतिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जाएगी. खबरों के मुताबिक, प्रिंसिपल ने कहा कि यह फैसला मैनेजमेंट ने लिया है
यूनिवर्सिटी के नियमों पर विवाद
ये विवाद ऐसे वक्त में सामने आया है जब देश भर के विश्वविद्यालय अनधिकृत विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर नियम सख्त कर रहे हैं. हाल ही में, दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दोनों ने छात्रों और फैकल्टी को ऐसे प्रदर्शनों से दूर रहने की सलाह दी और चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
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