Archaeological Survey of India: आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने उत्तराखंड के काशीपुर में खुदाई का एक नया फेज शुरू किया है. यहां मिले पुरातात्विक अवशेष प्राचीन भारतीय इतिहास, महाभारत परंपरा और चाइनीज स्कॉलर शुआनजांग की यात्राओं से जुड़े हैं. ASI अधिकारियों के मुताबिक रुद्रपुर के पास तकरीबन 90 एकड़ के एक टीले पर इस हफ्ते खुदाई शुरू हुई है, जो मार्च तक चलने की उम्मीद है.
पौराणिक संबंध और ऐतिहासिक महत्व
स्थानीय परंपराओं के मुताबिक ये वही जगह है जहां महाभारत काल में पांडवों और कौरवों के गुरु, द्रोणाचार्य रहते थे और अपने शिष्यों को प्रशिक्षण देते थे. लोक कथाओं के मुताबिक पांडवों ने अपने गुरु को ‘गुरु दक्षिणा’ के रूप में ‘द्रोण सागर झील’ का निर्माण करके दी थी. ये जगह ‘गोविषाण’ से भी जुड़ी है, ये एक प्राचीन बस्ती जिसका जिक्र 7वीं शताब्दी में भारत की यात्रा करने वाले चीनी विद्वान शुआनजांग ने किया था. ब्रिटिश आर्कियोलॉजिस्ट अलेक्जेंडर कनिंघम ने काशीपुर की पहचान उसी बस्ती के रूप में की थी, जिसका जिक्र शुआनजांग के ट्रैवलॉग में मिलता है.
इस जगह पर पहले भी हुई है खुदाई
ASI ने यहां कई स्टेजेज में खुदाई की है, जिनमें 1939-40, 1965–66 और 1970–71 के दौर शामिल हैं. इन खोजों में ‘भीम-गजा’ नामक स्थान पर एक प्राचीन मंदिर परिसर के अवशेष मिले थे, जो इस पुरातात्विक क्षेत्र के सबसे ऊंचे हिस्सों में से एक माना जाता है. ऐसा लगता है कि यह मंदिर तीन चरणों में विकसित हुआ था. इसका सबसे शुरुआती ढांचा गुप्त काल का हो सकता है, जिसमें मिट्टी की ईंटों से बना एक ऊंचा चबूतरा शामिल था. इसके बाद, छठी या सातवीं शताब्दी ईस्वी के आसपास इसके चारों ओर दो और दीवारें बनाई गई थीं. ASI अधिकारियों का कहना है कि पिछली खुदाई का अहम मकसद मंदिर के ढांचे को समझना था, न कि इस बस्ती के पूरे सांस्कृतिक इतिहास को सामने लाना.
नई खुदाई का मकसद क्या है?
ASI के देहरादून सर्कल के सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट मोहन जोशी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ बताया कि इस नई खुदाई का मकसद पहले मिली चीजों का वैज्ञानिक परीक्षण करना और ऐसे और सबूत खोजना है, जिससे इस जगह के कल्चरल सीक्वेंस को अनकवर किया जा सके. यहां पहले मिली चीजों में ‘पेंटेड ग्रे वेयर’ (मिट्टी के बर्तन) भी शामिल थे. ये बर्तन उत्तरी भारत की प्राचीन बस्तियों से जुड़े माने जाते हैं और इनका अध्ययन महाभारत से जुड़ी परंपराओं के संदर्भ में भी किया गया है. 1950 के दशक में हस्तिनापुर में पुरातत्वविद् बीबी लाल की तरफ से की गई खुदाई से, इस महाकाव्य के ऐतिहासिक संदर्भ पर चर्चा के दौरान इन मिट्टी के बर्तनों का भी जिक्र आया. हालांकि इस तरह के संबंधों से अकेले महाभारत की ऐतिहासिकता साबित नहीं होती.
यह भी पढ़ें- Viral Video: 7 साल खुदाई, 20 मीटर गहराई…कैसे मिला PM मोदी के गांव में 2800 साल पुराना शहर?
काशीपुर में कुषाण, गुप्त और मध्यकालीन दौर के मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं, जो बताते हैं कि यहां कई ऐतिहासिक चरणों में ह्यूमन एक्टिविटीज रही हैं. खबरों के मुताबिक हाल ही की खुदाई में ईंटों से बनी संरचनाएं और एक गोलाकार ढांचा मिला है. मौजूदा खुदाई का स्टेज पूरा होने के बाद, ASI ये तय करेगा कि आगे और खुदाई करने की जरूरत है या नहीं. अधिकारियों को इस जगह को पुरातात्विक शोध और पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना भी नजर आती है.
संबंधित खबरें
नौकरी से जुर्म की दुनिया का सफर...टाइगर केस में कैसे फंसीं राधा-बबीता?
3 hrs agoयूपी में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की होगी जांच, अफसरों पर एक्शन के निर्देश
14 hrs agoउन्नाव में हाईवे किनारे बॉक्स में मिली युवक की लाश, हिरासत में पत्नी
20 hrs agoयूपी चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पूर्व MLA कुशाग्र सागर ने छोड़ी पार्टी
20 hrs agoबैटरी फटने से पहले फोन में दिखते हैं ये 5 संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज
1 day agoयूपी चुनाव 2027 के लिए BJP का बड़ा प्लान, अमित शाह को कमान, जुटेंगे दिग्गज
1 day agoदिवाली से पहले गौर चौक अंडरपास खोलने की तैयारी, मिलेगी जाम से राहत
1 day agoशिवा मर्डर केस की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे गिरफ्तार, 11 दिनों से थी फरार
1 day agoUP में सरदार पटेल के सहारे BJP का बड़ा दांव! कुर्मी समाज को साधने की तैयारी
1 day agoदिवाली पर यूपी की 1.86 करोड़ महिलाओं को मिलेगा फ्री गैस सिलेंडर
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines