हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

'3 महीने में कराएं चुनाव', यूपी पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश, प्रशासक मामले पर भी दिया निर्देश

याचिकाओं में पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जाने और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे.

विज्ञापन
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. (Photo: ANI/AI)

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश दिया. हाईकोर्ट ने राज्य में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने को कहा है. साथ ही यह भी निर्देश दिया कि चुनाव होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक की भूमिका में काम करते रहेंगे. इस फैसले से उन याचिकाओं को लेकर कंफ्यूजन दूर हो गया है, जिनमें ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी गई थी.

आपको बता दें कि न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया. याचिकाओं में पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जाने और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे.

11 याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव और प्रशासकों की नियुक्ति से जुड़े मामले में कुल 11 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इनमें छह जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं. इन सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट की एक ही खंडपीठ में हुई. याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था. मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पंचायती राज विभाग के निदेशक, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया था.

विज्ञापन

अदालत ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश देने के साथ ही प्रशासकों की नियुक्ति और संबंधित कानूनी प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं. इसके बाद फिलहाल ग्राम पंचायतों का प्रशासन निवर्तमान प्रधानों के हाथों में ही रहेगा.

मई में समाप्त हो गया था पंचायतों का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई 2026 में पूरा हो गया था. इसके बाद पंचायत चुनाव नहीं हो सके. चुनाव में देरी की प्रमुख वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण निर्धारित करने की प्रक्रिया और इससे जुड़ा कानूनी विवाद बताया गया. राज्य सरकार ने आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन किया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में देरी हुई. चुनाव समय पर नहीं हो पाने के बाद सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी थी.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola