देहरादून: उत्तराखंड की अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में अहम खुलासा हुआ है। आरोपी पुलकित आर्य के रिजॉर्ट के कर्मचारी मनवीर चौहान ने बताया कि 17 सितंबर को अंकिता ने रोते हुए उसे फोन किया था। इस दौरान अंकिता ने कहा कि मेरा बैग लेकर सड़क पर रख दो। चौहान ने बताया कि अंकिता को आखिरी बार उसने दोपहर करीब 3 बजे देखा था। उस दौरान अंकिता के साथ तीन अन्य लोग रिजॉर्ट से बाहर निकले, लेकिन वापस तीन ही लोग लौटे।
चौहान ने बताया कि 18 सितंबर रात आठ बजे पुलकित आर्य का भाई अंकित आर्य मेरे पास आया। अंकित ने कहा कि मैं चार लोगों के लिए डिनर तैयार करूं। लगभग 10:45 बजे अंकित दोबारा आया और हमसे कहा कि वह अंकिता के कमरे में खाना खाएगा, जिस पर मैंने कहा कि हमारा सर्विस बॉय ऐसा करेगा, लेकिन वह नहीं माना। दरअसल, अंकित हम लोगों को गुमराह करना चाहता था, क्योंकि अंकिता वापस लौटी ही नहीं थी।
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रिजॉर्ट कर्मचारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि अगले दिन हमने देखा कि अंकिता अपने कमरे से गायब थी। उसका बैग, पैसा और खाना कमरे में ही रह गया था। उधर, अंकिता भंडारी के पिता 18 सितंबर को पुलिस के पास पहुंचे थे और उसके गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। करीब एक हफ्ते बाद यानी शनिवार को अंकिता का शव चील्ला नहर से बरामद किया गया। फिलहाल, एम्स ऋ्षिकेश में अंकिता के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।
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आरोपी पुलकित ने कबूल किया जुर्म
पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के रिजॉर्ट का मालिक और अंकिता मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि निजी विवाद को लेकर उसने रिजॉर्ट के पास अंकिता को एक नहर में धक्का दिया, जिसके बाद डूबने से अंकिता की मौत हो गई। बता दें कि इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को पुलकित आर्य, अंकित आर्य और एक अन्य को गिरफ्तार किया था। तीनों को कोटद्वार की एक कोर्ट में पेश किया गया जहां से तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जहां फ्यूचर बनाने पहुंची अंकिता, वहीं खत्म हुई जिंदगी
अंकिता भंडारी के परिवार की आर्थिक हालत काफी खराब है। पिता और परिवार का सहारा बनने के लिए अंकिता 28 अगस्त को जॉब के लिए ‘वनन्तरा रिजॉर्ट’ पहुंची थी। अंकिता को क्या पता था कि वो जहां फ्यूचर बनाने पहुंची थी, वहीं उसकी जिंदगी खत्म हो जाएगी। रिसेप्शनिस्ट के तौर पर जॉब शुरू करने वाली अंकिता के करियर का अभी एक महीना भी पूरी नहीं हुआ था कि उसके साथ ये अनहोनी हो गई।
ओएलएक्स पर ढूंढी थी नौकरी
जानकारी के मुताबिक, अंकिता ने जब पहली बार जॉब करने की बात कही थी तब उसके पिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद अंकिता जॉब तलाशने में जुटी रही। उसने ओएलएक्स एप पर देखा था कि वनन्तरा रिजॉर्ट में रेसेप्शनिस्ट की जरूरत है। फिर उसने बातचीत की और उसे जॉब मिल गई।
घर पर बात होती थी, लेकिन कभी शिकायत नहीं की
रिजॉर्ट में ज्वाइन करने के कुछ दिन बाद तक अंकिता की जॉब सही चलती रही, लेकिन बाद में रिजॉर्ट का मालिक पुलकित अंकिता पर गलत काम करने का दबाव बनाने लगा। अंकिता ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। अंकिता के इनकार करने के बाद पुलकित और अन्य आरोपी उसे परेशान करने लगे। बीच-बीच में अंकिता की उसके परिवार से बात भी होती थी, लेकिन कभी उसके इस बारे में जिक्र नहीं किया।
दोस्त को बताया तो नाराज हुआ पुलकित आर्य
गलत काम करने के बार-बार दबाव पर अंकिता चुप रही, परिवार को तो कुछ नहीं बताया लेकिन अपने दोस्त से इस बात का जिक्र किया। जब इस बारे में आरोपी पुलकित को पता चला तो उसने अंकिता की हत्या की साजिश रची। पुलकित ने अंकित और सौरभ को बताया कि अगर ये बात बाहर तक जाएगी तो फिर हम मुश्किल में फंस जाएंगे।
इसके बाद 18 सितंबर की शाम को पुलकित, अंकित और सौरभ अंकिता को लेकर ऋषिकेश पहुंचे। यहां फिर से पुलकित और अन्य आरोपियों ने उससे गलत काम करने और चुप रहने को कहा। इसके बाद अंकिता ने इनकार किया तो पुलकित और अन्य आरोपी उससे झगड़ा करने लगे। इसी बीच पुलकित ने अंकिता को चील्ला नहर में धक्का दे दिया।
अंकिता को मौत के घाट उतारने के बाद तीनों आरोपी रिजॉर्ट लौटे और कर्मचारी मनवीर चौहान से चार लोगों के लिए खाना बनाने को कहा ताकि किसी को शक न हो। फिर अंकित आर्य ने कहा कि वह अंकिता के कमरे में खाना लेकर जाएगा। अगली सुबह यानी 19 सितंबर को पुलकित और अंकित रिजॉर्ट से बाहर चले गए। थोड़ी देर बाद उन्होंने किसी बहाने से रिजॉर्ट के कर्मचारी को अंकिता के कमरे में भेजा ताकि कर्मचारियों की ओर से बताया जाए कि वह अपने कमरे में नहीं है।
आरोपियों ने जैसा सोचा था, सब उसी तरह हो रहा था। रिजॉर्ट के कर्मचारी ने बताया कि अंकिता अपने कमरे में नहीं हैं। इसके बाद तीनों आरोपी चौकी पहुंचे और अंकिता के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। 21 सितंबर तक किसी को भी भनक नहीं लगी कि अंकिता की हत्या हो चुकी है।
राज्य महिला आयोग ने लिया संज्ञान, तब जाकर…
अंकिता मामले ने तब जोर पकड़ा जब राज्य महिला आयोग ने संज्ञान लिया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पौड़ी गढ़वाल के जिलाधिकारी और एसएसपी को मामले की जांच कराने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई। फिर अंकिता के पिता के संदेह के आधार पर पुलिस रिजॉर्ट पहुंची और कर्मचारियों से पूछताछ की। फिर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलकित, अंकित और सौरभ को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो सारा सच सामने आ गया।
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