Kanwar Lal Meena Rajasthan MLA: राजस्थान विधानसभा के साथ एक अजीब संयोग रहा है। यहां ज्यादातर मौकों पर एक साथ 200 विधायक नहीं बैठे। या तो चुनाव होने से पहले ही किसी नेता का निधन हो जाता है या फिर किसी नेता का पद नहीं रहता या फिर कोई नेता सांसद बनने के बाद विधायकी छोड़ देता है। अब एक बार फिर बीजेपी विधायक कंवर लाल मीणा की सदस्यता रद्द होने की वजह से ये अजीब संयोग सामने आ गया है। यानी अब एक बार फिर 199 विधायक ही विधानसभा में बैठेंगे। पिछले 25 साल में सिर्फ एक बार ही ऐसा मौका 2025 में आया, जब पूरे 200 विधायक विधानसभा में बैठे नजर आए, लेकिन अब ये संयोग एक बार फिर सामने आ गया है, जब विधानसभा में विधायकों की संख्या 199 रह गई है।
नए भवन के साथ रहा संयोग
खास बात यह है कि साल 2001 में राजस्थान विधानसभा को ज्योतिनगर स्थित नए भवन में शिफ्ट किया गया था। इससे पहले साल 2000 तक विधानसभा जयपुर में पुराने शहर में स्थित एक भवन में चलती थी। हालांकि नए भवन के साथ यह संयोग रहा। नए भवन में शिफ्टिंग के बाद तत्कालीन विधायकों भीखा भाई और भीमसेन चौधरी का निधन हो गया। इसके बाद 2002 में बीजेपी विधायक जगत सिंह दायमा और कांग्रेस विधायक किशन मोटवानी नहीं रहे। एक साल बाद ही 2003 में विधायक रूपलाल मीणा की मौत हो गई। साल 2004 में सरकार में मंत्री रहे रामसिंह विश्नोई का निधन हो गया। 2006 में विधायक अरुण सिंह और नाथूराम अहारी भी गोलोकवासी हो गए।
रामगढ़ सीट प्रत्याशी का निधन
2008 से 2013 के बीच भी कुछ इसी तरह की परिस्थितियां रहीं। इसके बाद 2017 में मांडलगढ़ से विधायक कीर्ति कुमारी, 2018 में नाथद्वारा विधायक कल्याण सिंह का निधन हो गया। फिर अप्रैल 2018 में मुंडावर से विधायक धर्मपाल चौधरी नहीं रहे। इसके बाद 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान ही एक सीट पर प्रत्याशी की मौत हो गई। रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी के निधन के बाद 199 सीटों पर चुनाव कराए गए। अक्टूबर 2020 में कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी की मौत के बाद विधायकों संख्या 199 ही रह गई थी।
तीन बार 199 सीटों पर ही हुए चुनाव
इसी तरह 2023 के विधानसभा चुनाव में भी श्रीगंगानगर के करणपुर से विधायक और कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुन्नर का निधन हो गया था। इस वजह से 199 विधानसभा सीटों के लिए ही चुनाव कराए गए। साल 2013 में बसपा उम्मीदवार जगदीश मेघवाल और 2018 के विधानसभा चुनाव में रामगढ़ से BSP प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के चलते 199 सीटों पर ही चुनाव हो सके थे।
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इसके बाद राजस्थान में सरकार बनते ही बागीदौरा से कांग्रेसी विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्होंने BJP जॉइन की। विधायक पद से भी उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इस तरह 199 विधायक ही सदन में रहे। अलवर की रामगढ़ सीट से कांग्रेस विधायक जुबेर खान और उदयपुर की सलूंबर विधायक अमृतलाल मीणा के निधन के बाद सीटें खाली हो गई थीं।
अब आगे क्या होगा?
अब एक बार फिर कंवर लाल मीणा की सदस्यता रद्द होने की वजह से विधायकों की संख्या 199 ही रह गई है। उन्हें 20 साल पुराने मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद बीजेपी ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी। जिसे कांग्रेस ने 'सत्य की जीत' बताया है। आइए जानते हैं कि अब क्या होगा।
विधायक की सदस्यता रद्द होने के बाद बारां की अंता सीट पर उपचुनाव होंगे। हाड़ौती में ऐसे कम ही मौके रहे हैं, जब यहां उपचुनाव कराए जाएंगे। अब चुनाव आयोग को 6 महीने के अंदर ही उपचुनाव कराना होगा। अब कहा जा रहा है कि कंवर लाल मीणा की पत्नी भगवती बाई को मैदान में उतारा जा सकता है। कांग्रेस से प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला भाया का नाम भी चर्चा में है।
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वास्तुदोष की बात आई सामने
कई बार सदन में वास्तुदोष की भी बात सामने आ चुकी है। इस वजह से ही यहां गेट नंबर 5 और 6 को बंद कर दिया था। इसके बाद पूर्वी द्वार से ही प्रवेश करने की अनुमति दी जाने लगी। यहां तक कि विधायक यज्ञ-हवन और गंगाजल से शुद्धीकरण की भी मांग कर चुके हैं। पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने भी ऐसी ही मांग की थी।