करियर की दौड़, पढ़ाई के दबाव, भविष्य की चिंता और सही फैसले लेने की उलझन, आज युवाओं के सामने चुनौतियां केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं. ऐसे में राजस्थान विवि. ने युवाओं को भारतीय दर्शन और गीता के विचारों से जोड़ने की पहल की है. इसके तहत दर्शनशास्त्र विभाग में श्रीमद्भगवद्गीता पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा. अकादमिक परिषद की शुक्रवार को हुई विशेष बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. गीता पर डिप्लोमा को भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन को अकादमिक रूप से समझने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है. पाठ्यक्रम की अवधि, विषयवस्तु और प्रवेश संबंधी अन्य जानकारी जल्द ही सामने आएगी.
दार्शनिक पक्ष, समकालीन जीवन की होगी समझ
इस पाठ्यक्रम के जरिए विद्यार्थी गीता के दार्शनिक पक्ष और समकालीन जीवन में उसकी प्रासंगिकता को करीब से समझ सकेंगे. गीता में कर्म, कर्तव्य, निर्णय, आत्मबोध और जीवन के प्रति दृष्टिकोण जैसे विषयों पर विचार किया गया है. इनका अध्ययन युवाओं को जीवन की विभिन्न परिस्थितियों पर विचार करने और चुनौतियों को समझने का नया नजरिया दे सकता है. बैठक में दर्शनशास्त्र विभाग में ‘दार्शनिक प्रबोधन तथा परामर्श’ पर डिप्लोमा शुरू करने की अनुशंसा भी की गई. इसके माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन से जुड़े सवालों, विचारों और समस्याओं को समझने के लिए संवाद आधारित दृष्टिकोण से परिचित कराने का अवसर मिल सकता है.
राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने और एंटरप्रेन्योर (उद्यमी) बनने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों और इंडस्ट्रियलिस्ट (उद्योगपतियों) की लेक्चर सीरीज शुरू की जाएगी. इसके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशासनिक कार्यप्रणाली, उद्योग जगत और उद्यमिता के व्यावहारिक अनुभवों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा. वहीं, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल में कैंपस ड्राइव शुरू की जाएगी, ताकि उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ तनाव और अन्य समस्याओं से निपटने के लिए उचित मार्गदर्शन मिल सके.