गजब हो गया! जिसका नामांकन रद्द हुआ, वही जीत गया चुनाव; बन गया गांव का सरपंच

राजस्थान के बाड़मेर में नामांकन खारिज होने के बावजूद पूराराम सरपंच चुनाव जीत गए. बैलेट पेपर पर नाम रहने के मामले में प्रशासन ने जांच शुरू की.

Barmer panchayat election 2026

राजस्थान के बाड़मेर में नामांकन खारिज होने के बावजूद उम्मीदवार की जीत के मामले की जांच कर रहा प्रशासन. (Image- AI Generated)

राजस्थान के बाड़मेर जिले में पंचायत चुनाव में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गडरा रोड ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए एक ऐसे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया गया, जिसका नामांकन दस्तावेजों की जांच के दौरान खारिज कर दिया गया था. इसके बावजूद उसका नाम बैलेट पेपर पर मौजूद रहा और उसने चुनाव भी जीत लिया. मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं.

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कैसे खारिज हुआ था नामांकन?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पूराराम ने गडरा रोड ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया था. 23 अक्टूबर को नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच की गई. इस प्रक्रिया को स्क्रूटनी कहा जाता है. जांच के दौरान पूराराम के नामांकन पत्र में कुछ कमियां पाई गईं. नामांकन खारिज करने के लिए जारी की गई लिस्ट में बताया गया कि उन्होंने जरूरी दस्तावेजों में पूरी जानकारी नहीं दी थी. उनके आपराधिक इतिहास से जुड़े रिकॉर्ड वाले दस्तावेज भी अधूरे पाए गए थे. इसी आधार पर उनका नामांकन खारिज कर दिया गया. नामांकन खारिज होने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट सार्वजनिक की गई थी और उसे अधिकारियों ने नोटिस बोर्ड पर भी लगाया था. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए.

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बैलेट पेपर पर कैसे बना रहा नाम?

नामांकन खारिज होने के बावजूद चुनाव के दौरान बैलेट पेपर पर पूराराम का नाम और चुनाव निशान मौजूद था. वोटरों ने उनके पक्ष में वोट भी डाले और रिजल्ट आने पर उन्हें विजेता बता दिया गया. चुनाव में पूराराम को कुल 1786 वोट मिले. उन्होंने कुलदीप सिंह को 187 वोटों के अंतर से हरा दिया. अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्क्रूटनी के बाद पूराराम का नामांकन खारिज कर दिया गया था, तो उनका नाम चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट और बैलेट पेपर से क्यों नहीं हटाया गया? साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि नामांकन खारिज होने के बाद उन्हें चुनाव लड़ने का मौका कैसे मिला.

अधिकारियों पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर वायरल नामांकन खारिज किए गए उम्मीदवारों की लिस्ट में पूराराम का नाम भी शामिल था. चुनाव में हारने वाले कुलदीप सिंह के भाई भरत सिंह ने इस मामले में अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि नामांकन खारिज होने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट नोटिस बोर्ड पर लगाई गई थी और उसमें पूराराम का नाम था. भरत सिंह के मुताबिक, इसके बावजूद पूराराम को चुनाव लड़ने की अनुमति मिलना गंभीर मामला है. उन्होंने बताया कि चुनाव रिजल्ट रद्द करने की मांग को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई गई है.

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पूराराम बोले- विरोधी फैला रहे अफवाह

दूसरी ओर, पूराराम ने अपने चुनाव को सही बताते हुए आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि उनके विरोधी अफवाह फैला रहे हैं. पूराराम के मुताबिक, अधिकारी ने उन्हें आधिकारिक रूप से चुनाव निशान दिया था. उन्होंने कहा कि चुनाव में उन्हें जीत मिली है.

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