Rajasthan News: केजे श्रीवत्सन। राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां हर नागरिक को न्यूनतम आय की गारंटी का अधिकार मिलेगा। इसके तहत रोजगार के लिए इस अधिनियम के तहत आवेदन प्राप्त होने कि अगर 15 दिन में सरकार यदि रोजगार देने में विफल रहती है तो वह व्यक्ति बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगा।
इसके साथ ही अब सरकार भर्ती परीक्षाओं में नकल माफियाओं और पर्चें लिक करने वालों की संपत्ति जब्त कर उनकी 7 साल की सजा को भी बढ़ाकर अब उम्र कैद कर दिया गया है। इसे लेकर विधानसभा में रखे गए दोनों विधेयक गहलोत सरकार ने पास करवा लिए गए हैं।
15 दिन में रोजगार नहीं तो मिलेगा भत्ता
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने ‘राइट टू हेल्थ’ बिल के ठीक 4 महीने बाद ‘महात्मा गांधी राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी विधेयक 2023’ को भी पास करवा दिया है। आम आदमियों को सामाजिक सुरक्षा गारंटी के योजना के लिए सरकार की ये सबसे बड़ी योजना है, जिसके जरिए हर राजस्थानी को आवेदन के 15 दिन के भीतर सरकार से रोजगार नहीं मिलने की सूरत में मिनिमम इनकम गारंटी के तहत रोजगार भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा।
दो किस्तों में होगी बढ़ोत्तरी
महात्मा गांधी न्यूनतम आय गारंटी योजना, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी स्कीम, मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के रोजगार और वृद्धावस्था-विशेष योग्यजन, विधवा, एकल महिला के पात्र 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए के 1000 रूपये के मासिक पेंशन के लिए यह कानून होगा। इसके लिए 2,500 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रवाधान किए गए हैं। उसमें समय के साथ हर साल 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से दो किस्तों में यानी जुलाई में 5 प्रतिशत और जनवरी में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। बढ़ोतरी की जा सकेगी।
नकल माफियाओं की खैर नहीं
इसके साथ ही नौकरी के लिए होने वाली परीक्षा में नकल माफियाओं की अब खैर नहीं होगी। राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा एक्ट-2022 में संशोधन कर अधिकतम सजा सात साल से बढ़ाकर उम्रकैद तक कर दिया गया है। हालांकि जब पिछले साल इसे तैयार कराकर लागू किया गया था, उसके बाद भी राजस्थान में चार प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे।
ऐसे में अब ऐसे माफियाओं के खिलाफ और सख्ती दिखाते हुए उम्रकैद की सजा का प्रावधान जोड़ा गया है। सरकार के पास जहां अपने तर्क हैं, वहीं विपक्ष RPSC में धांधली होने के साथ बड़े लोगों को भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है। जिसको लेकर सदन में जमकर हंगामा भी हुआ।
सरकार का बड़ा दांव
बता दें कि चुनावी साल में इसे गहलोत गहलोत सरकार का बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। क्योंकि इससे एक बड़े वर्ग को न्यूनतम आय का भरोसा तो मिला है, साथ ही बेरोजगारों की चिंताएं और सरकारी नौकरी के लिए होने वाली परीक्षाओं की निष्पक्षता से जुडी बड़ी मांग भी पूरी हुई है। अब यही देखना होगा की सरकार कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से इसे लागू करती हैं। इसे सचिन पायलट की मांगों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
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