Jaipur Rain News: मैं मजदूर मुझे देवों की बस्ती से क्या, यह पक्तियां प्रसिद्ध कवि मैथिलीशरण गुप्त की है। जिसमें वे मजदूरों की व्यथा और उनके जीवन को बताते हैं। ठीक वैसा ही मजदूरों का जीवन होता भी है। आज भी मजदूर कच्चे और सड़कों के किनारे बनी झोपड़ियों में रहते हैं। उनका जीवन ऐसे ही कट जाता है। सर्दी, गर्मी और बारिश की परवाह किए बगैर ये मजदूर हमारे लिए घर बनाते हैं लेकिन खुद के लिए एक छत भी नहीं बनवा पाते। और फिर प्रकृति का कहर भी इन पर ही दिखता है। जयपुर में बुधवार और गुरुवार की रात्रि में कुछ ऐसा ही हुआ। एक पिता अपनी दो मासूमों के साथ अंदर सो रहा था। उसे नहीं पता था कि आज की रात उनके लिए आखिरी होगी।
जरा सोचिए उस पिता ने अपने दोनों बच्चों के लिए क्या कुछ सोचा होगा? लेकिन उसकी बच्चियां कुछ बन पाती अपने पिता को बड़ी होकर कुछ बनकर उनके सपने पूरे कर पाती इससे पहले ही प्रकृति तीनों को धरती से जुदा कर दिया।
राजधानी दिल्ली के बाद अब जयपुर के बेसमेंट एक परिवार के लिए काल बन गया। यहां विद्याधर नगर के एक घर में बने बेसमेंट में डूबने से 2 मासूम और उनके पिता की मौत हो गई। इस बेसमेंट में मजदूरों के परिवार रहते थे। दीवार ढहने के बाद सभी लोग बाहर निकलने की आपाधापी में इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान 2 मासूम और उनके पिता अंदर ही रह गए और बेसमेंट के पानी में डूबकर तीनों की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार हादसा बुधवार देर रात हुआ। वहीं राजधानी जयपुर में बुधवार दिन से रह-रहकर तेज बारिश का दौर जारी है। ऐसे में गुरुवार तड़के यह हादसा हुआ। हादसे के बाद सिविल डिफेंस की टीम ने लोगों के सहयोग से करीब 6 घंटे बाद दोपहर 12 बजे तीनों शव बाहर निकाले।
वहीं मामले में स्थानीय पार्षद ने कहा कि कल रात हुई बारिश के बाद पीछे के खाली प्लाॅट में पानी भरने लगा। इससे दोनों मकान के बीच की दीवार ढह गई। अचानक हुए हादसे के बाद घर में मौजूद 20 से 25 लोग बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। इस दौरान 3 लोग फंसे रह गए और उनकी डूबने से मौत हो गई। बता दें कि गुरुवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर 133 मिमी. बारिश रिकाॅर्ड की गई। रुक-रुक अभी भी बारिश का दौर जारी है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन बेसमेंट से पानी निकालने में जुटा है। करीब 12 से 15 फीट का पानी अभी भी बेसमेंट में मौजूद है।