राजस्थान के आमेर महल में संरक्षण कार्य के दौरान करीब 400 साल पुरानी वर्षा जल संग्रहण व्यवस्था सामने आई है. आमेर महल प्रशासन ने बुधवार को यह जानकारी दी. आमेर महल प्रशासन के अनुसार मानसिंह महल की बारादरी के नीचे बने इस प्राचीन टांके (under ground water harvesting tank) में महल की छतों, खुले गलियारों और चौकों से आने वाला वर्षा जल एकत्र किया जाता था. संरक्षण कार्य के दौरान पहली बार उजागर हुई यह जलसंग्रहण व्यवस्था अब पर्यटक देख सकेंगे.
कैसे मिली जानकारी?
आमेर महल के अधीक्षक डॉ. राकेश छोलक ने बताया कि महाराजा मानसिंह के शासनकाल (1589-1614) में निर्मित मानसिंह महल वर्तमान आमेर महल का सबसे पुराना हिस्सा है. उनके मुताबिक संरक्षण कार्य के दौरान बारादरी के पूर्वी हिस्से में बने पाथ-वे के पत्थर और पट्टियां हटाने पर प्राचीन जल संग्रहण व्यवस्था का पता चला. छोलक ने कहा कि अब तक आमेर आने वाले अधिकांश पर्यटक, गाइड और विषय विशेषज्ञ भी इस संरचना से अनजान थे.
कैसे होती थी हार्वेस्टिंग?
अधीक्षक के अनुसार, बारादरी के नीचे बने टांके में मानसिंह महल की छतों, भूतल के खुले गलियारों और चौकों का पानी पहुंचता था तथा वर्षा जल के साथ आने वाली मिट्टी और कचरे को अलग करने के लिए विशेष संरचना बनाई गई थी. उन्होंने बताया,‘‘ इस प्राचीन टांके की खासियत इसकी वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणाली है. टांके के मध्य में चार फुट तीन इंच लंबा-चौड़ा और करीब ढाई फुट गहरा एक चौकोर कुंड बनाया गया था. वर्षा जल के साथ आने वाली गाद और कचरा इसमें जमा हो जाता था. पानी पूर्वी दिशा में मोरी (नली) के माध्यम से आगे बढ़कर मुख्य टांके में एकत्र होता था. ’’
कैसे शुद्ध किया जाता था पानी?
मुख्य टांके के पूर्वी हिस्से में भी एक छोटा कुंड बनाया गया था, ताकि पानी के साथ आने वाली मिट्टी और गंदगी नीचे बैठ जाए. छोलक ने बताया कि टांके की सफाई के दौरान पानी निकालने के लिए ऊपरी हिस्से में अलग मोरी बनाई गई थी, जिसे पानी संग्रहित करते समय बंद कर दिया जाता था. उन्होंने कहा कि टांका भर जाने पर अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए भी अलग मोरी की व्यवस्था थी. यह संरचना दर्शाती है कि करीब चार शताब्दी पहले भी वर्षा जल को सहेजने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए सुनियोजित व्यवस्था विकसित की गई थी. अधीक्षक ने कहा किे यह तत्कालीन शासकों की जल प्रबंधन संबंधी समझ और दूरदर्शिता का उदाहरण है. इस ऐतिहासिक संरचना को उजागर करने में आमेर महल प्रशासन, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अभियंताओं तथा मानसिंह महल में संरक्षण कार्य कर रही फर्म ‘मैसर्स विप्रांशु एंटरप्राइजेज’ की भूमिका रही.