इंटरनेट बंद, 18 गाड़ियां फूंकी, आगजनी-पथराव… पुलिस-किसानों में हिंसक टकराव, हनुमानगढ़ में क्यों मचा है बवाल?

Hanumangarh Farmers Protest and Violence: राजस्थान के हनुमानगढ़ में एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बवाल मचा हुआ है. पुलिस और किसान आमने-सामने हैं. किसान फैक्ट्री को तबाह करने पर तुले हैं और पुलिस ने उन्हें रोकना चाहता तो किसानों ने पथराव करते हुए आगजनी की, जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

Hanumangarh Farmers Protest and Violence

हनुमानगढ़ में किसानों और पुलिस में हिंसक झड़प हुई है.

Hanumangarh Farmers Protest and Violence: राजस्थान के हनुमानगढ़ में किसानों ने बवाल काटा हुआ है. टिब्बी कस्बे और आस-पास के गांवों में पिछले 24 घंटे से इंटरनेट बंद है और धारा 163 लागू है. स्कूल-कॉलेज, बाजार-दुकानें बंद हैं. पूरा इलाका पुलिस छावनी बना हुआ है. किसानों और पुलिस की झड़प में करीब 70 किसान घायल हुए हैं. पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया का सिर फूट गया.

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किसानों ने तोड़ दी फैक्ट्री की दीवार

वहीं पुलिस की कार्रवाई से गुस्साए किसानों ने पुलिस की 18 गाड़िया फूंक दी. फैक्ट्री की दीवार तोड़ दी और अंदर घुसकर ऑफिस पर आग लगा दी. पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो पलटवार करते हुए पथराव किया. भड़के किसानों को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, जिससे कई किसान घायल हुए. वहीं अब फैक्ट्री के आस-पास रहने वाले करीब 30 परिवार पलायन कर गए हैं. करीब 100 किसान टिब्बी के गुरुद्वारे में ठहरे हुए हैं.

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साल 2022 में साइन हुआ था MOU

हनुमानगढ़ कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव ने बताया कि हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी के राठीखेड़ा गांव में एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल फैक्ट्री ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड बन रही है, जिसके लिए साल 2022 में ‘राइजिंग राजस्थान’ के दौरान 450 करोड़ का MOU साइन हुआ था. साल 2023 में जमीन की रजिस्ट्री हुई और चेंज ऑफ लैंड यूज की परमिशन मिली. स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की अनुमति लेकर भी सरकारी औपरचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं.

किसान इसलिए कर रहे हैं विरोध

लेकिन किसान केंद्र सरकार के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत डेवलप हो रहे प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि किसानों का कहना है कि इससे भूजल प्रदूषित होगा और वायु प्रदूषण बढ़ेगा. जमीन बंजर हो सकती है और लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी यह हानिकारक है. फैक्ट्री को लगाने के लिए पर्यावरण विभाग की मंजूरी भी नहीं मिली है, इसलिए किसान का कहना है कि पर्यावरण मंजूरी और लोगों की सहमति मिलने बिना वे फैक्ट्री नहीं लगने देंगे.

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महापंचायत के बाद हुआ टकराव

फैक्ट्री को बंद करवाने के लिए 15 महीने से किसान शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, लेकिन बीते दिन मोर्चा खोलते हुए बीते दिन किसानों ने महापंचायत बुलाई, जिसके बाद किसान फैक्ट्री बंद कराने के लिए निकले तो पुलिस ने भीड़ को रोका. इस दौरान पुलिस और किसानों में झड़प हो गई. इस टकराव ने हिंसक रूप धारण कर लिया, जिसके बाद इलाके को घेरकर हनुमानगढ़ शहर से बाहर टिब्बी चौराहे पर बैरिकेडिंग की और दुकानें-बाजार बंद करवा दिए. स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं.

पुलिस ने हिरासत में लिए कांग्रेसी

बता दें कि आज गुरुवार को भी टिब्बी में गुरुद्वारे में ठहरे किसानों ने महापंचायत बुलाई, जिसमें हिस्सा लेने के लिए निकले कांग्रेस कार्यकर्ता को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया. पुलिस ने बींझबायला मंडी बस स्टैंड से कांग्रेस विधायक विधायक रूपिंदर सिंह कुन्नर को हिरासत में लिया. PCC सदस्य विकास गौड़, यूथ कांग्रेस जिलाधयक्ष करण सहारण, जगतार समरा को भी पुलिस साथ ले गई है. वहीं कंपनी के डायरेक्टर जतिंदर अरोड़ा और रॉबिन जिंदल मामले में चुप्पी साधे हुए हैं.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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