Rajasthan Politics: “माया मिली न राम”…राजस्थान की सियासत में ये कहावत आज कांग्रेस छोड़कर BJP में आए नेताओं पर बिल्कुल फिट बैठती दिख रही है. चुनाव से पहले जिन नेताओं ने सत्ता के सपने देख BJP का दामन थामा…आज वही नेता खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं. इसी कड़ी में बड़ा नाम है कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे महेंद्रजीत सिंह मालवीय, जिन्होंने अब फिर से कांग्रेस में लौटने का ऐलान कर दिया है. महेंद्रजीत सिंह मालवीय, चार दशक तक कांग्रेस की राजनीति में मजबूत पकड़, अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे, 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी जीता… लेकिन उसके बाद अचानक कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हो गए. कहा गया, नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाए जाने से नाराज होकर उन्होंने पार्टी बदली.
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BJP ने मैदान में उतारा पर मिली हार
महेंद्रजीत सिंह मालवीय को BJP ने बड़ा दांव मानते हुए डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, लेकिन वहां भी हार का सामना करना पड़ा और विधायक़ी की भी चली गई. चुनाव हारने के बाद उम्मीद थी BJP सरकार में संगठन या सत्ता में सम्मानजनक जगह मिलेगी. लेकिन दो साल बीतने के बाद भी ना कोई पद, ना कोई जिम्मेदारी.मालवीय ने वापसी का एलान करते हुए साफ कहा—डबल इंजन की सरकार में भी मैं कार्यकर्ताओं का काम नहीं करवा पा रहा था, BJP में मेरा दम घुट रहा था और यहीं से शुरू हुई घर वापसी की कहानी. मालवीय के पार्टी छोड़ने के ऐलान पर BJP ने फिलहाल डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है. प्रदेश BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है,अब तक उन्हें मालवीय का इस्तीफा नहीं मिला है, और अगर कोई नाराज़गी है तो बातचीत से समाधान निकाला जाएगा.
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BJP में आए ऐसे नेताओं की फेहरिस्त लंबी
मालवीय तो खुलकर बोल चुके हैं,लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि BJP में आए ऐसे नेताओं की फेहरिस्त लंबी है जो चुपचाप वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं. BJP सरकार बने दो साल हो चुके हैं,लेकिन कई बाहरी नेताओं को ना संगठन में जगह मिली,ना सत्ता में तवज्जो. हालात ये हैं कि कई नेता पार्टी की बैठकों में भी नजर नहीं आते. या तो उन्हें बुलाया नहीं जा रहा या फिर सम्मान न मिलने से उन्होंने खुद ही दूरी बना ली है. BJP ने नई प्रदेश टीम बनाते वक्त खुलकर कहा था, “बाहरी नेताओं को पहले निष्ठा साबित करनी होगी.”
मालवीय के बाद कुछ और भी नेता करेंगे घर वापसी?
विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस और अन्य दलों के कई बड़े चेहरे BJP में शामिल हुए. एंट्री हुई ढोल-नगाड़ों के साथ, लेकिन चुनाव के बाद वही नेता खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे. एक-दो को छोड़ दें तो ज्यादातर नेता आज इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं. इन्हीं में शामिल बताए जा रहे हैं पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया, राजेंद्र यादव, जेपी चंदेलिया,खिलाड़ी लाल बैरवा,आलोक बेनीवाल, रमेश खींची, दीपचंद खेरिया, गिर्राज सिंह मलिंगा,पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल और कांग्रेस कोषाध्यक्ष रहे सीताराम अग्रवाल. अब बड़ा सवाल यही है, क्या महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बाद कुछ और भी नेता करेंगे घर वापसी? और क्या BJP इस सियासी असंतोष को समय रहते संभाल पाएगी? नतीजा ये रहा कि एक-दो नामों को छोड़ ज्यादातर नेता टीम से बाहर रह गए.
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