पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रही है, बल्कि सरकार का ध्यान उन युवाओं को नई जिंदगी देने पर भी है, जो कभी नशे में फंसे थे. कॉलेज के वर्षों के दौरान वह अपने साथियों के साथ नशे के प्रभाव में आ गया था, जुगराज सिंह (बदला हुआ नाम) इस बदलाव को दर्शाता है जिसने केवल स्वाद के लिए इसे चखा था लेकिन जल्द ही यह स्वाद निर्भरता में बदल गया. आज उसका सारा ध्यान अपनी पढ़ाई पूरी करने और अपने भविष्य पर केंद्रित है. उसने कहा कि मुझे लगता है कि मैं एक बेहतर इंसान बन गया हूं.
युद्ध नशों विरुद्ध के साथ दी जाने वाली पुनर्वास सेवाओं और काउंसलिंग के समर्थन से, जुगराज अपनी जिंदगी फिर से शुरू करके शिक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता की ओर अपना ध्यान केंद्रित करने में सक्षम हुआ है.
आनंद कुमार (बदला हुआ नाम) को नशे के सीधे आर्थिक परिणाम भुगतने पड़े. नशा लेने के कारण उसकी दैनिक दिनचर्या और निर्णय लेने की क्षमता काफी कमजोर हो गई, जिससे उसका छोटा सा व्यवसाय भी समाप्त हो गया. उसने याद किया कि एक समय मुझे महसूस हुआ कि मैंने अपना सब कुछ खो दिया है.
इसी तरह कई युवाओं ने स्वीकार किया कि नशे की आदत ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था, लेकिन सही समय पर मिली चिकित्सा, परिवार का सहयोग और कार्य के अवसरों ने उन्हें फिर से खड़े होने की प्रेरणा दी. अब वे अपनी शिक्षा, नौकरी और भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे अभियान के माध्यम से पुनर्वास, मानसिक सलाह और नौकरी सहायता द्वारा कई लोगों की जिंदगी फिर से सही दिशा में आगे बढ़ रही है.राज्य के कई पुनर्वास केंद्रों में अब केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. नशे के कारण लोगअपनी पढ़ाई, परिवार और करियर खो चुके युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के मौके प्रदान किए जा रहे हैं ताकि वे पुनः समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें .
ये वृत्तांत ‘आप’ सरकार द्वारा अपनाई गई व्यापक पहुंच को दर्शाते हैं, जहां नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कार्यान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पीड़ितों को समाज की मुख्य धारा से फिर से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास भी शामिल हैं. युद्ध नशों विरुद्ध, पुनर्वास, काउंसलिंग और रोजगार देने में सहायता प्रदान करना पीड़ितों के लिए दीर्घकालिक स्थिर रिकवरी सुनिश्चित करता है.
सभी मामलों में एक समान परिणाम दिखाई दे रहे हैं, नशे की लत को फिर से लगने से रोकने के लिए रोजगार प्रदान करना बहुत सहायक सिद्ध हो रहा है.
विशेषज्ञों की राय है कि केवल पुलिस की कार्रवाई से नशे की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता. इसके लिए चिकित्सा, मानसिक सहायता और स्थायी नौकरी बहुत ही आवश्यक हैं. यही कारण है कि पंजाब सरकार अब वसूली के बाद लोगों को लंबे समय तक सहायता प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि वे फिर से नशे में न लौट सकें
भगवंत मान सरकार का दावा है कि इस पहल से हजारों परिवारों में उम्मीद लौटी है, और युवा अब नशे से दूर होकर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं.
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