राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में पंजाब द्वारा शीर्ष स्थान हासिल करने की उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने आज राज्य के 19,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में मेगा अभिभावक-शिक्षक मिलन (पीटीएम) आयोजित किया. इस दौरान पूरे प्रदेश में सहभागी शिक्षा का उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला.‘शिक्षा का महा उत्सव’ के बारे में जानकारी साझा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह विशेष आयोजन नीति आयोग की स्कूल शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में पंजाब को प्रथम स्थान मिलने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया.
केरल को छोड़ा पीछे
इस रिपोर्ट में पंजाब ने बुनियादी शिक्षा के प्रमुख मानकों पर केरल को पीछे छोड़ दिया, जिसे लंबे समय से देश में स्कूली शिक्षा का स्वर्ण मानक माना जाता रहा है. हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस सामूहिक उपलब्धि के सम्मान में आज शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उनके अथक योगदान के लिए सम्मानित किया गया. इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं के टॉपरों, इंग्लिश एज कार्यक्रम के उपलब्धि हासिल करने वाले विद्यार्थियों तथा जेईई क्वालिफायर छात्रों सहित उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष सम्मान और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए.
क्या है खास?
इस उपलब्धि को बनाए रखने में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि मेगा पीटीएम और अभिभावक कार्यशालाओं में 20 लाख से अधिक अभिभावकों ने भाग लिया. यह व्यापक कार्यक्रम ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों की सीखने की निरंतरता बनाए रखने, अवकाश गृहकार्य के प्रभावी प्रबंधन तथा सकारात्मक दिनचर्या विकसित करने पर केंद्रित था. इस व्यापक कार्यक्रम के सफल और गुणवत्तापूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को लाइव यूट्यूब सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया. शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित सहयोगी स्टाफ और सक्रिय स्कूल प्रबंधन समितियों ने अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने, समन्वय स्थापित करने तथा गतिविधियों के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
पंजाब के लिए मील का पत्थर!
हरजोत सिंह बैंस ने इस उपलब्धि को ‘पंजाब शिक्षा क्रांति’ का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए कहा, “यह नंबर-1 रैंक केवल सरकार की उपलब्धि नहीं है, बल्कि हर उस अभिभावक की है जिसने सरकारी स्कूलों पर विश्वास जताया, हर उस विद्यार्थी की है जिसने मेहनत की और हर उस शिक्षक की है जिसने पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर शिक्षा प्रदान की. हमने सरकारी स्कूलों को अंतिम विकल्प से पहली पसंद में बदल दिया है. दशकों तक यह माना जाता रहा कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है, लेकिन पंजाब ने इस धारणा को गलत साबित कर दिखाया है. यह रैंक हमारे कक्षाओं से उत्पन्न हुई शिक्षा क्रांति का प्रमाण है.”
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