देश में मां का चमत्कारी मंदिर, जहां पूरी होती संतान की मनोकामना, हर साल लगता लंगूरों का मेला
Edited By Pooja Mishra

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Navratri Special Bada Hanuman Mandir: नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो गई है। पूरे देश में लोग आज मां दुर्गा की पूजा- आराधना कर रहे हैं। नवरात्रि का पर्व एक ऐसा त्योहार है जिसे देश के कोने-कोने में अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है। पंजाब के अमृतसर में स्थित दुर्ग्याणा मंदिर के पास बड़े हनुमान मंदिर में नवरात्र पूजा दौरान एतिहासिक लंगूर लगाया जाता है। हनुमान मंदिर में लगने वाले इस लंगूर मेले में बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों को लंगूर बनाकर लाते है। बड़े वानर का रूप धारण किए कई बच्चें न मंदिर में माथा टेकने के लिए आते है।
ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में मन्नत मांगने पर निसंतान महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। जिनकी मन्नत पूरी हो जाती है वो लोग बच्चों को लंगूर बना कर मंदिर में माथा टेकाने के लेकर आते है। घर से लेकर बड़ा हनुमान मंदिर तक ढोल की थाप पर लंगूर बने बच्चे नाचते, गाते और जय श्री राम का नारा लगाते हुए आते हैं। भारत में दुर्ग्याणा मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है जहां मन्नत पूरी होने पर लोग अपने बच्चे को पूरे नवरात्र के दौरान लंगूर बनाकर मंदिर में माथा टेकने के लिए लाते है। इस मेले में बच्चे सिल्वर का गोटा लगी हुए लाल रंग के कपड़े पहनते हैं, साथ ही सिर पर शंकाकार टोपी पहनते हैं। इसके अलावा बच्चों के पैरों में घूंघरू भी बंधते है।
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बताया जाता है कि लंगूर बनने वाला बच्चा सुई, धागे का काम और कैंची नहीं चला सकता। उसे दिन में 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना जरूरी होता है। दशहरे के दिन लंगूर बने बच्चे रावण और मेघनाद के पुतलों को तीर से मारते हैं। इसके अगले दिन सभी बच्चे मंदिर में हनुमानजी के आगे माथा टेककर अपना बाणा उतारते हैं।
इस मंदिर का रामायण काल से बहुत ही खास कनेक्शन है। ऐसी मान्यता है कि बड़ा हनुमान मंदिर वही जगह है जहां पर लव-कुश ने भगवान हनुमान को बंधी बनाया था।
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