अमिताभ ओझा, पटना: पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए झंझारपुर कोर्ट के जज के खिलाफ दायर केस को वापस करने का निर्देश दिया है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई से हाईकोर्ट के जज नाराज थे। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार के डीजीपी और मधुबनी के एसपी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट मे जस्टिस राजन गुप्ता और मोहित शाह के बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए बिहार पुलिस के तरीके पर ऐतराज जताते हुए फटकार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट की अवमानना
दरअसल, कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रतिकूल एवं आदेश का अवमानना बताया। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार, पुलिस को किसी भी ज्यूडिशियल अफसर के खिलाफ मामला दर्ज करने के पहले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इजाजत लेनी पड़ती है, लेकिन इस मामले में इस प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
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मामला झंझारपुर कोर्ट में जज के चेंबर में घुसकर थानेदार और एक और दरोगा द्वारा एडीजे प्रथम अविनाश कुमार की पिटाई का है। घटना पिछले साल 18 नवंबर को हुई। बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर सिविल कोर्ट में घोघरडीहा थाने के थानेदार गोपाल कृष्ण और दरोगा अभिमन्यू कुमार शर्मा ने चेंबर में घुसकर जज के साथ मारपीट की थी। थानेदार ने जज पर पिस्तौल तान दी थी। कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों ने जज को किसी तरह बचाया था। इस वाकये के बाद बिहार पुलिस ने जो किया उस पर पटना हाईकोर्ट बुरी तरह नाराज है।
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