सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि कुछ लोग सिद्धिविनायक मंदिर को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर की छवि खराब नहीं होनी चाहिए और ट्रस्ट प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है.

सरवणकर ने कहा कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं की सभा में जिस पत्र का उल्लेख किया, उसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की ओर से ऐसा कोई पत्र नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.

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'चोरी का खुलासा ट्रस्ट ने ही किया'

सदा सरवणकर ने बताया कि मंदिर में कुछ कर्मचारियों द्वारा चोरी की घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन इन्हें पकड़ने का काम ट्रस्ट प्रशासन ने ही किया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी नांगरे पाटिल का सहयोग मिला. उन्होंने बताया कि दानपेटी की रकम गिनने वाले दिन सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे, अधिकारियों की तैनाती की गई और सीसीटीवी कंट्रोल रूम के कर्मचारियों को बदला गया. इसके बाद चोरी में शामिल कर्मचारियों का खुलासा हुआ.

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9 कर्मचारी गिरफ्तार, 46 पर कार्रवाई

सरवणकर के मुताबिक, राजन पेंडुरकर नामक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया और उसकी मदद करने वाले आठ अन्य कर्मचारियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया. सभी आरोपी नौ दिन तक जेल में रहे. उन्होंने कहा कि शुरुआत में एफआईआर में केवल एक नाम था, लेकिन बाद में जांच के दौरान अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया. ट्रस्ट की शिकायत के बाद कुल 46 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि 9 कर्मचारियों को निलंबित किया गया.

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दर्शन के नाम पर वसूली करने वालों पर कार्रवाई

ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि गूगल पे के जरिए पैसे लेकर वीआईपी दर्शन कराने वाले 19 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई. इसके अलावा दर्शन के नाम पर पैसे वसूलने वाले स्टॉल संचालकों पर भी सख्त कार्रवाई की गई.

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सरवणकर ने आरोप लगाया कि चोरी के मामले में शामिल अधिकांश कर्मचारी उद्धव ठाकरे गुट की सिफारिश पर नियुक्त किए गए थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि विशाखा राउत ने कुछ कर्मचारियों को नौकरी पर रखा था. उन्होंने कहा कि राज ठाकरे ने अपने भाषण में यह नहीं बताया कि संबंधित घटनाएं पुराने ट्रस्टियों के कार्यकाल की थीं.

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फंड में गड़बड़ी की आशंका

सरवणकर ने कहा कि ट्रस्ट को मिलने वाले फंड में भी गड़बड़ी की आशंका है. उन्होंने बताया कि आरोपियों से कुल 80 हजार रुपये बरामद किए गए, लेकिन ट्रस्ट का मानना है कि जितनी भी रकम की चोरी हुई है, उसकी पूरी वसूली होनी चाहिए. इसी वजह से पुलिस के साथ-साथ सीबीआई जांच की भी मांग की गई है.

ऑडिट के बाद भ्रष्टाचार पर सख्ती

उन्होंने कहा कि ऑडिट के बाद ट्रस्ट ने 30 सुरक्षा कर्मचारियों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. वरिष्ठ नेताओं ने भी ट्रस्ट से केवल यही अपेक्षा जताई है कि मंदिर का प्रशासन पूरी तरह पारदर्शी और स्वच्छ रहे.

मरीजों की मदद के लिए बढ़ाई गई आर्थिक सहायता

सरवणकर ने बताया कि इस वर्ष ट्रस्ट ने जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए 36 करोड़ रुपये दिए हैं, जबकि पहले यह राशि 20 करोड़ रुपये थी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 में यह सहायता केवल 6 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 14 करोड़ रुपये किया गया.

अगले साल 250 करोड़ रुपये से अधिक होगा बजट

उन्होंने कहा कि अगले वर्ष सिद्धिविनायक ट्रस्ट का बजट 250 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है. साथ ही सवाल उठाया कि जब ट्रस्ट ने खुद चोरी का खुलासा किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराई, तो फिर ट्रस्ट के इस्तीफे की मांग क्यों की जा रही है. अंत में सदा सरवणकर ने दोहराया कि राज ठाकरे ने जिस पत्र का जिक्र किया, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और ट्रस्ट की ओर से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया.