दो बच्चों की मां, परिवार के मुश्किल हालात और सरकारी कर्मचारी बनने के पक्के इरादे के साथ, दो साल की कड़ी मेहनत के बाद, दिंद्रुड की सुमैया आखिरकार महाराष्ट्र पुलिस फोर्स में शामिल हो गईं.
जब वह मुंबई रेलवे पुलिस फोर्स में शामिल हो रही थीं, तो अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने अपने (शरीफभाई) दिव्यांग पिता को कंधों पर उठाकर जो खुशी मनाई, वह देखने लायक थी.
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सुमैया की इस सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, अनुशासन और परिवार का समर्थन रहा. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. रोजाना घर की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ पढ़ाई और शारीरिक तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
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उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि पूरे गांव में गर्व की भावना है. सुमैया आज उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं.
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