बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को अभिनेता इमरान हाशमी के घर की रेकी करने के लिए भी कहा गया था. यह जानकारी इस मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस को जांच के दौरान पता चली. हमलावर इमरान हाशमी के घर की रेकी करने भी गए थे, लेकिन उन्हें हाशमी का घर नहीं मिला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर पर हमले से पहले हमलावरों ने सलमान खान और आमिर खान के घरों की भी रेकी की थी.
हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में एक पुलिस अधिकारी से हवाले से लिखा है, ‘सलमान हमेशा से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर रहे हैं. इस बार उन्होंने अभिनेता आमिर खान के घर की भी रेकी की, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि वे दक्षिण मुंबई शिफ्ट हो गए हैं, इसलिए वे उन्हें ढूंढ नहीं पाए.’
इसके बाद हमलावरों को हाशमी के घर की रेकी करने के लिए कहा गया. इसके बाद वे रेकी करने भी गए थे. उन्होंने उस इलाके में स्थानीय स्तर पर खूब पूछताछ भी की, लेकिन उन्हें घर नहीं मिला. फिर हमलावरों ने घर नहीं मिलने की जानकारी अपने हैंडलर्स को दे दी.
साथ ही अधिकारी ने बताया, ‘सोशल मीडिया पर टाइगर श्रॉफ की रील्स देखकर और यह पता चलने पर कि वह हर रविवार फुटबॉल खेलने के लिए जुहू के पुष्पा नर्सी ग्राउंड जाते हैं. फिर उन्होंने टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने का फैसला किया.’
अब तक 11 हिरासत में
मुंबई पुलिस अभी तक इस मामले में 11 आरोपियों को हिरासत में ले चुकती है. सोमवार को हरियाणा के सोनीपत से गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों 21 वर्षीय राधा वर्मा, 21 वर्षीय बबीता राव, 21 वर्षीय कुणाल जामिनसिंह और 19 वर्षीय सुमित सरोलिया को कोर्ट में पेश किया गया था. कोर्ट ने उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया.
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इन लोगों ने ही शूटर्स को हथियार मुहैया कराए थे. इन चार आरोपियों में से कुणाल जामिनसिंह, बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य अनिल पंडित के संपर्क में था. अनिल पंडित ने ही श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी. जामिनसिंह ने राधा वर्मा को एक पिस्तौल दी थी, जिसके बाद राधा वर्मा और बबीता राव ने 17 अक्टूबर को दादर में कथित शूटर्स में से एक रेहान अंसारी से मुलाकात की और उसे वह पिस्तौल सौंप दी.
बता दें, इस घटना में टाइगर श्रॉफ तो गोली लगने से बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर और एक ब्लॉगर गोलियां लगने जख्मी हो गए. हमलावर टाइगर की कार पर गोलियां बरसाने के बाद वहां से फरार हो गए थे. जिसके बाद उन्हें अगले दिन राजस्थान के कोटा से पुलिस ने गिरफ्तार किया था. गोलियां चलाने वाले मुंबई से सूरत तक कैब के जरिए आए थे, इसके बाद वे राजस्थान ट्रेन में सवार होकर पहुंचे.