Maharashtra Politics News: आगामी बीएमसी चुनाव 2026 से ठीक पहले शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) के बीच बढ़ती नजदीकियां और 'विलय' (Merger) की खबरों ने महायुति और महाविकास अघाड़ी (MVA) दोनों में हलचल मचा दी है. जानकार कहते हैं कि यह केवल चुनावी गठबंधन नहीं, बल्कि 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले पवार परिवार को फिर एकजुट करने की एक बड़ी पटकथा है. इसी बीच अजित पवार ने टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि BMC में शरद पवार के विधायक उनके विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन चाहते हैं.
चाचा-भतीजे में कैसे बढ़ीं नजदीकियां?
पुणे में शरद पवार गुट से सुप्रिया सुले और अजित पवार ने एक ही मंच से साझा घोषणापत्र जारी कर दिया है, जो भविष्य में एक होने का बड़ा संकेत है. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी अजित पवार को 'घर वापसी' की नसीहत दी है, जिससे कयासों को और बल मिला है. हालांकि अजित पवार फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं, लेकिन बीजेपी नेताओं पर उनके हालिया तीखे हमले कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.
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शरद पवार के इस पैंतरे के मायने समझें
अजित पवार बीजेपी के साथ गठबंधन (Mahayuti) में हैं, लेकिन बीएमसी चुनाव में सीटों को लेकर उनके बीच तनाव बढ़ रहा है. शरद पवार इसी मौके का फायदा उठाकर अजित को वापस 'घर' लाने की कोशिश में हैं. शरद पवार जानते हैं कि अगर दोनों गुट अलग लड़े तो एनसीपी का पारंपरिक वोट बंट जाएगा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा. चुनाव चिन्ह 'घड़ी' अजित पवार के पास है. शरद पवार चाहते हैं कि बीएमसी जैसे बड़े चुनाव में पार्टी का ब्रांड 'पवार' कमजोर न पड़े. हालांकि अजित पवार ने स्पष्ट किया है कि शरद पवार गुट के साथ उनकी कोई अनऑफिशियल बातचीत नहीं चल रही.
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करीब 40 विधायकों के साथ अलग हुए थे अजित
शिवसेना में बंटवारे के बाद जब एनसीपी में बगावत हुई तो करीब 40 विधायकों के साथ अजित पवार अलग हुए और महायुति के साथ मिलकर अलग-अलग लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उतरे. पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव में दोनों दलों के साथ आने से पुराने रिश्ते जुड़ते नजर आ रहे हैं. अजित पवार ने शरद गुट के विधायकों का उनके साथ आने की मांग करने की एक वजह विधायक फंड भी है. फंड नहीं मिलने से शरद पवार के खेमे में बेचैनी बढ़ रही है. पहले समय में विपक्ष में रहते हुए विकास निधि मिल जाती थी, आजकल ऐसा नहीं है. 5 साल से विपक्ष में हों, विकास निधि न मिले तो हताश होना स्वाभाविक है.