मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जिओ वर्ल्ड प्लाजा में फर्जी PMO अधिकारी बनकर पहुंचने के आरोप वाले मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी रोहन पारिख और उसके सहयोगी दिलीप कुंडे को जमानत दे दी है. किला कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डी. एस. खेडेकर ने सोमवार को दोनों आरोपियों को 50,000 के कैश बॉन्ड पर जमानत मंजूर की. दोनों को 7 सितंबर की घटना के बाद गिरफ्तार किया गया था.
क्या है पूरा मामला?
मामला 7 सितंबर 2026 का है. बीकेसी स्थित जिओ वर्ल्ड प्लाजा में प्रवेश के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने दिलीप कुंडे के पास हथियार देखा. इसके बाद कथित तौर पर दोनों की सुरक्षा कर्मियों से बहस हुई. इसी दौरान रोहन पारिख ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बताते हुए एक पहचान पत्र दिखाया. सुरक्षा टीम को पहचान पत्र संदिग्ध लगा और पुलिस को सूचना दी गई.
पुलिस के मुताबिक, कुंडे के पास से रिवॉल्वर बरामद किया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि कुंडे पूर्व सैन्यकर्मी है. पुलिस ने अदालत में दावा किया था कि उसके पास मौजूद हथियार व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लाइसेंसी था और उसके इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जा रही थी. शुरुआती जांच में पुलिस ने यह भी कहा था कि हथियार का लाइसेंस नासिक ग्रामीण क्षेत्र के लिए था, जबकि उसे मुंबई लाया गया था.
इस मामले की जांच का सबसे अहम पहलू कथित तौर पर AI के इस्तेमाल से फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करना है. पुलिस ने अदालत को बताया था कि रोहन पारिख के घर की तलाशी के दौरान PMO से जुड़े कई कथित फर्जी अंग्रेजी दस्तावेज मिले. पुलिस का दावा है कि इन दस्तावेजों और फर्जी PMO ID को तैयार करने में ChatGPT समेत AI टूल्स का इस्तेमाल किया गया था. पुलिस के अनुसार, पारिख ने कथित तौर पर 2025 से ऐसे दस्तावेज तैयार किए थे.
पुलिस की रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक, पारिख ने कथित तौर पर यह काम परिवार और अपने सामाजिक दायरे में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने और खुद को प्रभावशाली दिखाने के लिए किया. उसके मोबाइल डेटा में PMO से संबंधित पत्राचार और आधिकारिक पत्रों का मसौदा तैयार करने से जुड़ी सर्च हिस्ट्री मिलने की बात भी जांच एजेंसी ने अदालत में कही थी.
हालांकि, इन दावों को पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
जमानत याचिका में बचाव पक्ष ने दावा किया कि पारिख का जिओ वर्ल्ड प्लाजा जाना पूरी तरह निजी काम से जुड़ा था और उसे आसपास होने वाले किसी VIP कार्यक्रम या लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी नहीं थी. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना में किसी व्यक्ति को चोट या नुकसान नहीं हुआ. बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि पुलिस मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य दस्तावेज पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए आरोपियों से आगे किसी महत्वपूर्ण बरामदगी की जरूरत नहीं बचती. इसी आधार पर आगे की हिरासत का विरोध किया गया था.
मामले का PM मोदी के कार्यक्रम से क्या संबंध था?
घटना की टाइमिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि जिओ वर्ल्ड प्लाजा में यह घटनाक्रम 7 सितंबर को हुआ था और अगले दिन पास के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Global Fintech Fest 2026 कार्यक्रम था. शुरुआती जानकारी के बाद मामले को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से जोड़कर देखा गया था, लेकिन पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि जिओ वर्ल्ड प्लाजा की घटना का अगले दिन होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से कोई प्रत्यक्ष संबंध सामने नहीं आया है.
अब 21 सितंबर 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डी. एस. खेडेकर ने रोहन पारिख और दिलीप कुंडे को 50,000-50,000 के कैश बॉन्ड पर जमानत दे दी है. फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में दोनो आरोपियों को जमानत मिल गई है, लेकिन फर्जी PMO पहचान पत्र, AI से कथित दस्तावेज तैयार करने, हथियार के इस्तेमाल और तीसरे व्यक्ति की भूमिका से जुड़े जांच के पहलू अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.