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कुंभ मेले के फर्जी टेंडर से 3.05 करोड़ की ठगी, मंत्री का रिश्तेदार बताने वाले समेत दो गिरफ्तार

फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठेकेदारों को कुंभ मेले में काम दिलाने का झांसा दिया गया और उनसे लाखों रुपये वसूले गए. (मंगल भारत घनदाट की रिपोर्ट)

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नासिक कुंभ मेले की तैयारियों के बीच करोड़ों रुपये के फर्जी टेंडर घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि कुंभ मेले के लिए जारी होने वाले टेंडरों की आड़ में ठगों ने करीब 3.05 करोड़ रुपये की रकम हड़प ली. इस मामले में नासिक पुलिस ने जामनेर से तनय महाजन और नरेंद्र महाजन को हिरासत में लिया है.

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कुल 591 करोड़ रुपये के छह फर्जी टेंडर तैयार किए थे. इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठेकेदारों को कुंभ मेले में काम दिलाने का झांसा दिया गया और उनसे लाखों रुपये वसूले गए. मामले में नासिक रोड पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

नासिक में आगामी कुंभ मेले को लेकर करीब 32 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं. इसी बड़े बजट को देखते हुए ठगों ने सरकारी काम दिलाने के नाम पर अपना जाल फैलाया. आरोप है कि उन्होंने नासिक के विभागीय आयुक्त और कुंभ प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण गेडाम के फर्जी हस्ताक्षर और डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करते हुए सरकारी दस्तावेज जैसे दिखने वाले टेंडर और वर्क ऑर्डर तैयार किए.

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इन फर्जी टेंडरों में पुलिस के लिए भोजन, नाश्ता, पीने का पानी, बैटरी और इन्वर्टर के अलावा बिस्तर, चादर और बाल्टियों जैसी सप्लाई के काम शामिल थे. बताया जा रहा है कि इन दस्तावेजों को ठेकेदारों के बीच इस तरह प्रसारित किया गया कि वे वास्तविक सरकारी टेंडर लगें.

1.40 करोड़ रुपये एक ठेकेदार से वसूले

मामले में औरंगाबाद के एक ठेकेदार की शिकायत से पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया. शिकायत के मुताबिक, तनय महाजन और नरेंद्र महाजन ने तीन ठेके दिलाने का भरोसा दिया था. इसके बाद आरोपियों ने भारत सरकार का प्रतीक चिन्ह और ‘Government of Maharashtra Nashik-Trimbakeshwar Kumbh Mela Authority’ का नाम इस्तेमाल करते हुए फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार किए.

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इन दस्तावेजों पर नासिक के तत्कालीन विभागीय आयुक्त और कुंभ प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण गेडाम के डिजिटल सिग्नेचर और नासिक महानगरपालिका के टेंडर नोटिस नंबर का भी इस्तेमाल किया गया.

शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपियों ने तनय महाजन की फर्म ‘सीता ट्रेडर्स’ और शकील अहमद सलिमुद्दीन शेख के खातों में 1.34 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए, जबकि नरेंद्र महाजन को 5.50 लाख रुपये नकद दिए गए. इस तरह कुल करीब 1.40 करोड़ रुपये की रकम ली गई. इसके बदले शिकायतकर्ता की फर्म के नाम पर करीब 268 करोड़ रुपये के फर्जी वर्क ऑर्डर दिए गए.

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मंत्री के नाम का सहारा लेने का आरोप

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि तनय महाजन खुद को मंत्री गिरिश महाजन का करीबी और रिश्तेदार बताकर ठेकेदारों पर प्रभाव जमाता था. जानकारी के मुताबिक, तनय महाजन, अनंत महाजन का बेटा है, जिन्हें मंत्री गिरिश महाजन का चचेरा भाई बताया जा रहा है.

हालांकि, आरोप है कि तनय महाजन का मंत्री गिरिश महाजन से कोई प्रत्यक्ष संपर्क नहीं था. इसके बावजूद मंत्री के नाम और राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर ठेकेदारों को भरोसे में लिया जाता था. नरेंद्र महाजन पेशे से फोटोग्राफर बताया जा रहा है. पुलिस को आशंका है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर अलग-अलग ठेकेदारों को निशाना बनाया.

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छह फर्जी टेंडर, तीन शिकायतकर्ता सामने आए

मंत्री गिरिश महाजन ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि आरोपियों ने इसी तरह पांच अन्य टेंडरों के नाम पर भी धोखाधड़ी की. अब तक तीन शिकायतकर्ता सामने आने की जानकारी है. पुलिस इस पूरे मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि छह फर्जी टेंडर किसने तैयार किए, इनमें इस्तेमाल किए गए सरकारी दस्तावेज और डिजिटल सिग्नेचर कहां से हासिल किए गए और इस नेटवर्क में आरोपियों के साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

कुंभ मेले की तैयारियों के बीच सामने आए इस फर्जीवाड़े ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया और ठेकेदारों के बीच दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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