मुंबई अपनी समुद्री हवाओं के लिए जानी जाती है. आमतौर पर ये हवाएं प्रदूषण को फैलाने में मदद करती हैं, जिससे गंदी हवा एक जगह जमा नहीं होती. लेकिन इस बार समुद्र के किनारे बसा यह शहर भी प्रदूषण की मार झेल रहा है. कुछ दिनों में मुंबई की हवा दिल्ली से भी ज्यादा खराब दर्ज की गई.
15 अक्टूबर को3 IQAir के आंकड़ों में मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 152 था. इस आधार पर मुंबई भारत के प्रदूषित शहरों में पहले और दुनिया में पांचवें स्थान पर रही. हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, उसी दिन मुंबई का AQI 98 था. दोनों संस्थाएं अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए इन रिकॉर्ड की सीधी तुलना नहीं की जा सकती. इस साल जनवरी और फरवरी में भी मुंबई का AQI करीब 400 तक पहुंच गया था. इस बार बारिश की कमी के बाद गर्मी और उमस वाले मौसम के बीच प्रदूषण फिर बढ़ रहा है.
मुंबई में प्रदूषण बढ़ने की वजह क्या है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, गाड़ियों का धुआं और कंस्ट्रक्शन के काम से उड़ने वाली धूल प्रदूषण की बड़ी वजह हैं. इसके अलावा, हवा की रफ्तार धीरे होने से प्रदूषित हवा जल्दी नहीं फैल पा रही है और जमीन के पास जमा हो रही है. वैज्ञानिक गुफरान बेग का कहना है कि मौसम में बदलाव और होने वाले सुपर अल नीनो भी इस स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कई बार लोगों को आंखों से धुंध दिखाई देती है, लेकिन निगरानी केंद्रों के आंकड़े प्रदूषण की गंभीरता पूरी तरह नहीं दिखा पाते.
पराली और कचरा जलाने से भी बढ़ रही परेशानी
अक्टूबर और नवंबर में हवा की दिशा के कारण मध्य प्रदेश और झारखंड में खेतों में जलाई जाने वाली पराली का धुआं मुंबई तक पहुंचने की संभावना पर भी ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि, इसका असर हवा की दिशा और रफ्तार पर निर्भर करता है. मुंबई के आसपास के इलाकों में खुले में कचरा जलाना भी बड़ी चिंता है. पर्यावरण कार्यकर्ता सुमायरा अब्दुलअली के मुताबिक, अलीबाग और ठाणे जिले के भिवंडी जैसे इलाकों में कचरा जलाया जाता है. इससे निकलने वाला धुआं मुंबई और आसपास की हवा को प्रभावित कर सकता है.
उनके सेंसर से लिए गए माप में कुछ जगहों पर कचरा जलने के पास PM2.5 का स्तर 1,000 से ज्यादा दर्ज हुआ था. अलीबाग के कुछ इलाकों में यह 300 से 400 के बीच था. कई ग्रामीण इलाकों में हवा की गुणवत्ता मापने वाले सरकारी केंद्र नहीं हैं, इसलिए प्रदूषण का सही स्तर जानना मुश्किल होता है.
पटाखों से भी बढ़ता है प्रदूषण
त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने से हवा और खराब हो सकती है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह सुरक्षित होने की गारंटी नहीं देते. नियमों का पालन नहीं होने पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब
मुंबई में बढ़ते प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने चिंता जताई है. 21 अक्टूबर को अदालत ने पुलिस, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा कि प्रदूषण रोकने और पटाखों से जुड़े आदेशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. अदालत ने अधिकारियों को 26 अक्टूबर की सुनवाई में अपनी कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है. पहले भी अदालत शहर में प्रदूषण कम करने के उपायों को लेकर अधिकारियों पर सवाल उठा चुकी है.
मुंबई की मौजूदा स्थिति बताती है कि समुद्र के पास होने से ही हवा साफ नहीं रह सकती. प्रदूषण पर काबू पाने के लिए गाड़ियों और निर्माण से निकलने वाले धुएं-धूल को कम करना, खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाना और पटाखों से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करना जरूरी है.