सूखे की चपेट में महाराष्ट्र! कई जिलो में 40-50 प्रतिशत कम हुई बारिश, क्या है मौसम की बेरुखी का कारण?

महाराष्ट्र सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है. किसानों को जमीन राजस्व, कर्ज वसूली, बिजली बिल और अन्य राहत देने का ऐलान किया गया है.

सूखे की चपेट में महाराष्ट्र! कई जिलो में 40-50 प्रतिशत कम हुई बारिश, क्या है मौसम की बेरुखी का कारण?

महाराष्ट्र के 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों के लिए राहत उपायों का ऐलान किया गया. (Image- AI Generated)

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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है. यानी राज्य के करीब 74 फीसदी तालुके इस दायरे में आए हैं. सरकार ने सूखे से निपटने के लिए ‘ट्रिगर-1’ लागू कर दिया है. राज्य के Drought Management Code के तहत ‘Trigger-1’ सूखे की स्थिति का पहला चरण है. इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 फीसदी से ज्यादा कमी हो और लगातार 21 दिनों तक बारिश न हो. सरकार ने सूखाग्रस्त इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए कई फैसले लिए हैं.

फसल नुकसान का तुरंत होगा सर्वे एवं जमीन के राजस्व से छूट

जिला कलेक्टरों को फसलों के नुकसान का जल्दी पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि फसलों की मौजूदा स्थिति दर्ज करने के लिए फोटो और GPS लोकेशन भी पता लगाई जाए. इससे नुकसान के आकलन में पारदर्शिता रखने में मदद मिलेगी. सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को भूमि राजस्व में पूरी छूट दी जाएगी. इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस भी माफ की जाएगी. सरकार ने कृषि से जुड़े कर्ज की वसूली पर तत्काल रोक लगाने और फसल लोन के पुनर्गठन  का भी आदेश दिया है.

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बिजली बिल और कनेक्शन को लेकर भी राहत और बड़े स्तर पर जल संरक्षण

7.5 हॉर्सपावर तक के किसान पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ किए जा चुके हैं. अब इससे ज्यादा क्षमता वाले पंपों को भी बिजली बिल में रियायत दी जाएगी. पानी की कमी वाले गांवों में किसान पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे. सरकार सूखे से निपटने के लिए बड़े स्तर पर जल संरक्षण के काम भी शुरू करेगी. इसका उद्देश्य मौजूदा पानी की कमी से राहत देने के साथ आने वाले समय में पानी की स्थिति को बेहतर करना है.

रोजगार, राशन और पशुओं के चारे की व्यवस्था

सरकार ने रोजगार बढ़ाने के लिए रोजगार गारंटी योजना के नियमों में भी ढील देने का फैसला किया है. खेती पर निर्भर किसानों और कृषि मजदूरों को खाने-पीने के सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी. इसके अलावा सूखाग्रस्त इलाकों में पीने के पानी और पशुओं के चारे की व्यवस्था की जाएगी. जरूरत पड़ने पर टैंकर भेजे जाएंगे और पशुओं के लिए चारे-पानी का इंतजाम पहले से किया जाएगा.

क्या है बारिश में कमी का कारण?

अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई. जून से 18 सितंबर तक वास्तविक वर्षा 755.9 मिमी हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है. राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर संभाग में एक जून से 18 सितंबर तक 424.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 613.1 मिमी होनी चाहिए थी, यानी 30.8 प्रतिशत कम वर्षा हुई. मराठवाड़ा के धाराशिव और पांच अन्य जिले छत्रपति संभाजीनगर संभाग के अंतर्गत आते हैं. पुणे और नासिक संभागों में भी बारिश में लगभग 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि अमरावती और नागपुर संभागों 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई. कोंकण संभाग में बारिश में 6.3 प्रतिशत की कमी रही.

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