महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में आरएसएस के गढ़ नागपुर में कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया है. नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है. कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3271 वोटों से हरा दिया है. नागपुर क्षेत्र आरएसएस का गढ़ के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी है. इस जीत के साथ कांग्रेस ने कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की 28 सीटों पर चल रहे MLC चुनावों में अपना खाता भी खोल लिया है.
नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से 38 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें मुख्य मुकाबला वंजारी और भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के बीच था. उन्होंने विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ के समर्थन वाले कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था. इस गठबंधन में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) शामिल हैं. पेशे से वकील और शिक्षाविद वंजारी ने 2020 में नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी.
नतीजे आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारे लगाए. मनकापुर इंडोर स्टेडियम के बाहर भी तनाव की स्थिति बन गई, जहां मतगणना के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को दखल देना पड़ा.
अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए वंजारी ने कहा कि भाजपा ने नागपुर में अपने नेताओं और संसाधनों को झोंक दिया था, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस का समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी. उनके सभी नेता नागपुर में मौजूद थे. फिर भी मतदाता हमारे साथ खड़े रहे.’ वंजारी ने इस नतीजे का श्रेय कांग्रेस और MVA के भीतर की एकजुटता को भी दिया. उन्होंने बताया कि कई संगठनों ने उनके अभियान का समर्थन किया था.
कौन हैं वंजारी?
वंजारी एक वकील और शिक्षाविद हैं. वह कई वर्षों से कांग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं. उन्होंने पहली बार 2020 में नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी. लगातार दूसरी जीत के साथ यह सीट कांग्रेस के पास बनी हुई है. आरएसएस के गढ़ के अलावा यह सीट फडणवीस और गडकरी दोनों का राजनीतिक गढ़ भी है.
नागपुर के सियासी घराने से आने वाले अभिजीत वंजारी को सियासत विरासत में मिली. उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर विधानसभा से दो बार विधायक रहे, और इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत ने भी ये राह पकड़ी. राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की पढ़ाई करने वाले अभिजीत यूनिवर्सिटी की सीनेट और मैनेजमेंट काउंसिल के मेंबर भी रहे हैं.
उनकी सियासी पारी की नींव छात्र राजनीति से पड़ी, जहां वे 1998 से 2002 तक महाराष्ट्र NSUI के महासचिव रहे. इसके बाद प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव के तौर पर उन्होंने अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवाया. संगठन में उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अहम सियासी राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी भी सौंपी.