विदेश में नौकरी का सपना देख रहे लोगों को सुनहरे भविष्य का भरोसा दिलाकर ठगी करने वाली गैंग का मुंबई पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पायधुनी पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को तीन अलग-अलग ठिकानों से गिरफ्तार किया है. पुलिस को आरोपियों के पास से 50 भारतीय पासपोर्ट, दो फर्जी नियुक्ति पत्र, 6 कंप्यूटर-लैपटॉप और 9 मोबाइल फोन समेत बड़ी संख्या में दस्तावेज मिले हैं. मामला मस्जिद बंदर वेस्ट स्थित ‘अल शिफा ट्रैवल्स’ के ऑफिस से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक, विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर यहां नौकरी तलाश रहे लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता था. उम्मीदवारों से उनका मूल पासपोर्ट और बायोडाटा लिया जाता था. इसके साथ ही हर व्यक्ति से 15 हजार रुपये भी वसूले जाते थे.
लोगों को उम्मीद थी कि कुछ ही समय में विदेश जाने और नौकरी करने का रास्ता खुल जाएगा. लेकिन पैसे और जरूरी दस्तावेज हाथ लगने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर नौकरी तो नहीं दिलाई, रकम भी वापस नहीं की. कुछ समय बाद ऑफिस बंद कर दिया गया और आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर दिए.
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शिकायत मिली तो खुला ठगी के नेटवर्क का राज
मामला सामने आने के बाद पायधुनी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपियों की तलाश शुरू की. इसी जांच के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों को अलग-अलग राज्यों और शहरों से दबोचा. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तबरेज आलम अंसारी, मोहम्मद शमीम अंसारी और वेंकटेश गंगव्या चकल के रूप में हुई है. तबरेज आलम अंसारी को हरियाणा, मोहम्मद शमीम अंसारी को बिहार के मधुबनी और वेंकटेश गंगव्या चकल को मुंबई के टेमकर स्ट्रीट स्थित जे.जे. डॉर्मेट्री से गिरफ्तार किया गया.
50 पासपोर्ट ने बढ़ाई पुलिस की चिंता
पुलिस के हाथ लगे 50 पासपोर्ट इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी माने जा रहे हैं. शुरुआती जांच में अब तक 10 लोगों से ठगी की पुष्टि हुई है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट मिलने के बाद पुलिस को आशंका है कि इस गैंग का शिकार बनने वालों की संख्या 50 से भी ज्यादा हो सकती है. पुलिस अब बरामद पासपोर्ट और दस्तावेजों की जांच कर रही है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि इन लोगों से कब और कितनी रकम ली गई थी. साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी नियुक्ति पत्र कहां तैयार किए जाते थे और इस नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन लोग शामिल हैं.
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विदेश जाने की चाहत बनी ठगी का जरिया
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, गैंग खास तौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाती थी जो विदेश में नौकरी की तलाश में थे. नौकरी और विदेश जाने का भरोसा देकर उनसे पासपोर्ट, बायोडाटा और पैसे लिए जाते थे. अब पुलिस बरामद दस्तावेजों के जरिए इस कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है.
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