धुले से पवन मराठे
सरकारी नौकरी का सपना… स्थायी वेतन, सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद. इसी सपने को हथियार बनाकर ठगों ने ऐसा जाल बुना कि पढ़े-लिखे युवा भी उसके चंगुल में फंस गए. टपाल (डाक) और ईमेल के जरिए सरकारी विभागों के नाम पर भेजे गए फर्जी अपॉइंटमेंट ऑर्डर ने भरोसे की ऐसी दीवार खड़ी की कि किसी को शक तक नहीं हुआ और देखते ही देखते 78 लाख 74 हजार 500 रुपये ठग लिए गए. मामले में शिकायतें महाराष्ट्र के धुले के चालीसगांव रोड पुलिस स्टेशन और पश्चिम देवपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई हैं.
ऐसे बुना गया भरोसे का जाल :
ठगों ने सबसे पहले मोबाइल कॉल के जरिए संपर्क साधा. बातचीत में आत्मविश्वास, सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी और विभागों के नामों का जिक्र सब कुछ इतना विश्वसनीय था कि सामने वाला खुद को चयनित उम्मीदवार समझने लगा. इसके बाद टपाल से “सरकारी लेटरहेड” पर छपे नियुक्ति पत्र और ईमेल के जरिए भेजे गए डिजिटल ऑर्डर ने भरोसे की मुहर लगा दी. पत्रों में जॉइनिंग डेट, पदनाम, वेतनमान और आधिकारिक हस्ताक्षर तक शामिल थे. ईमेल आईडी भी सरकारी जैसी दिखने वाली बनाई गई थी. यही वह बिंदु था जहां पढ़े-लिखे युवा भी भ्रमित हो गए.
पहला मामला: 61.74 लाख रुपये का झांसा
धुले के बारेअंबिका नगर निवासी 25 वर्षीय युवक को मई 2023 से फरवरी 2025 के बीच संपर्क कर आयकर, लोक निर्माण और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी का लालच दिया गया. Income Tax Department, Public Works Department और Health Department के नाम पर फर्जी अपॉइंटमेंट ऑर्डर भेजे गए. “प्रोसेसिंग फीस”, “डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन” और “फाइनल अप्रूवल” जैसे बहानों से रकम मांगी गई. युवक ने नौकरी पक्की समझकर अपने भाई और परिचितों से उधार लेकर कुल 61 लाख 74 हजार 500 रुपये आरोपियों को दे दिए. लेकिन जॉइनिंग की तारीख टलती रही, संपर्क टूट गया और सपना बिखर गया.
दूसरा मामला: 17 लाख में ‘पक्की नौकरी’ का वादा
गोंदूर रोड क्षेत्र की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके रिश्तेदार को State Excise Department में नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिया गया. जनवरी 2024 से शुरू हुई बातचीत में फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर 17 लाख रुपये ले लिए गए. न नौकरी मिली, न पैसे लौटे.
पढ़े-लिखे युवा क्यों फंसे?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि शिकार बने लोग पढ़े-लिखे और जागरूक थे. ठगों ने मनोवैज्ञानिक दबाव और “सीमित सीट” जैसी रणनीति अपनाई. कहा गया कि “मौका हाथ से निकल जाएगा”, “फाइल ऊपर तक पहुंच चुकी है”, “आज भुगतान नहीं किया तो चयन रद्द हो जाएगा.”सरकारी मुहर, आधिकारिक भाषा और डाक से भेजे गए कागजात ने शक की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी.
धुले का यह मामला एक कड़वी सच्चाई सामने लाता है सरकारी नौकरी की चाहत को अपराधी सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं. पढ़े-लिखे युवाओं के सपनों पर यह हमला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक आघात भी है.
अब जांच जारी है, लेकिन सवाल यही है सरकारी नाम और मुहर का मुखौटा पहनकर घूम रहे इन ठगों के जाल से आखिर कितने और सपने बच पाएंगे?
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