महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नगर निकाय चुनावों के बाद बने कुछ स्थानीय गठबंधनों पर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने बीजेपी की स्थानीय इकाइयों को साफ निर्देश दिया है कि वे कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ किए गए गठबंधनों को तुरंत खत्म करें. यह निर्देश अंबरनाथ और अकोट नगर परिषदों से जुड़ा है. मुख्यमंत्री ने इन गठबंधनों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी राजनीतिक समझौते पार्टी की विचारधारा और सार्वजनिक संदेश के खिलाफ हैं. बीजेपी नेतृत्व नहीं चाहता कि स्थानीय स्तर पर ऐसे फैसले हों जो राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में गलत संकेत दें.
अंबरनाथ नगर परिषद का सियासी गणित
अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को 60 सदस्यीय सदन में 27 सीटें मिली थीं, जो बहुमत से सिर्फ चार कम थीं. बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12, अजित पवार की एनसीपी को 4 और दो सीटें निर्दलीयों को मिलीं. शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर परिषद पर कब्जा किया. यह गठबंधन इसलिए चर्चा में आया क्योंकि बीजेपी आम तौर पर कांग्रेस के खिलाफ राजनीति करती रही है. इसी वजह से पार्टी के भीतर और बाहर इस फैसले पर सवाल उठे.
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अकोट में एआईएमआईएम के साथ गठबंधन
अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में भी बीजेपी ने एआईएमआईएम और कुछ अन्य दलों के साथ मिलकर सत्ता बनाई. यह गठबंधन भी असामान्य माना गया क्योंकि बीजेपी अक्सर एआईएमआईएम की राजनीति का विरोध करती रही है. इन दोनों नगर परिषदों के फैसलों के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी की छवि और विचारधारा से समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने स्थानीय नेताओं को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे फैसले लेने से पहले संगठन को भरोसे में लिया जाए.
विपक्ष का हमला और सियासी तंज
इन गठबंधनों को लेकर शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया जाता है और दूसरी तरफ कांग्रेस के साथ सत्ता के लिए हाथ मिलाया जाता है. उन्होंने अजित पवार को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि वे सावरकर की विचारधारा में विश्वास नहीं रखते. वहीं सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति आसान नहीं है और यहां नैतिकता पर भाषण देने से पहले सबको चुप रहना चाहिए.
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