महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज राज्य में UCC (समान नागरिक संहिता) के नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की घोषणा की. इस समिति में सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के तीन पूर्व जज, एक संवैधानिक विशेषज्ञ, एक पूर्व नौकरशाह और सामाजिक क्षेत्र से दो सदस्य शामिल होंगे.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज महाराष्ट्र विधानसभा में यह घोषणा की. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली इस समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे: हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सी. चव्हाण, हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एस. जी. मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डी. के. जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल (AG) वीरेंद्र सराफ, सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री रमेश पतंगे और शिक्षाविद डॉ. सुवर्णा रावल.
विधानसभा में घोषणा करते हुए फडणवीस ने बताया कि इस पैनल में हाई कोर्ट के पूर्व जज आर.सी. चव्हाण और एस.जी. मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डी.के. जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संविधान विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि समिति छह महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. उन्होंने कहा, ‘हम नागपुर में राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कानून पेश करने की कोशिश करेंगे.’
संविधान में राज्य के नीति-निर्देशकों का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा, ‘इसी के तहत, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का खाका तैयार करने के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.’
महाराष्ट्र से पहले, असम और गुजरात ने भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करना शुरू कर दिया था, जबकि उत्तराखंड इसे लागू करने वाला पहला राज्य बना.
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मनीषा कयांडे ने किया सीएम के फैसले का स्वागत
वहीं, सरकार के कदम का स्वागत करते हुए मनीषा कयांडे ने कहा कि समान नागरिक संहिता का समर्थन करना लंबे समय से शिवसेना का वैचारिक रुख रहा है. उन्होंने कहा कि दिवंगत बाल ठाकरे तीन अहम मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के साथ थे — राम मंदिर का निर्माण, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाना और समान नागरिक संहिता लागू करना.
उन्होंने कहा कि शिवसेना ने धर्म से परे सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून के विचार का लगातार समर्थन किया है और मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा और इस सुधार को अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में से एक बनेगा.
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