falseत्योहारों में सड़कों पर पटाखे और लेजर लाइट पर पूरी तरह रोक, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
Author: Vijay Jain
2026-09-23 17:16:00
त्योहारों और धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले भारी ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने पूरे महाराष्ट्र में सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने, डीजे-लाउडस्पीकर के बेतहाशा शोर और खतरनाक लेजर बीम लाइट के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह निर्देश जारी किए.
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “त्योहार इसलिए नहीं होते कि आम लोग बीमारियों का शिकार हों या किसी की जान पर बन आए. क्या लाउडस्पीकर बजाने और पटाखे फोड़ने से भगवान हमें कोई अतिरिक्त आशीर्वाद दे देंगे? एक जिम्मेदार समाज के तौर पर अब हमें इस पर विराम लगाना ही होगा.” कोर्ट ने पंढरपुर की प्रसिद्ध ‘वारी’ यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लाखों लोग बिना किसी लाउडस्पीकर या हंगामे के बेहद शांतिपूर्ण तरीके से निकलते हैं.
यह भी पढ़ें: बॉम्बे हाई कोर्ट क्लर्क भर्ती टाइपिंग टेस्ट में भारी गड़बड़ी, अभिजीत दिपके ने उठाए व्यवस्था पर सवाल
कोर्ट द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देश
- साउंड लिमिटर और डेसिबल मीटर अनिवार्य: आयोजकों को अपने साउंड सिस्टम में इंटरनल साउंड लिमिटर लगाना होगा और कार्यक्रम स्थल पर साफ दिखने वाले डेसिबल मीटर लगाने होंगे. इसके लिए हलफनामा भी देना होगा.
- सिक्योरिटी डिपॉजिट होगी जब्त: जुलूस या आयोजन के लिए मंडलों को 1 लाख रुपये और व्यक्तिगत आयोजकों को 50,000 रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी. तय डेसिबल सीमा का उल्लंघन होते ही यह रकम जब्त कर ली जाएगी.
- सामान की जब्ती और सीधी निगरानी: नियमों का पालन न करने वाले साउंड सिस्टम तुरंत जब्त किए जाएंगे. अधिकारी आयोजकों की मौजूदगी में डेसिबल लेवल दर्ज करेंगे.
- अनुमति पत्र और संपर्क विवरण दिखाना जरूरी: जुलूस के दौरान मंजूरी से जुड़े दस्तावेज, आयोजकों के नाम और फोन नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने होंगे.
- जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी: आयोजकों को कार्यक्रम स्थल और जुलूस में अनुमति पत्र के साथ अपने नाम, पते और मोबाइल नंबर का बोर्ड लगाना होगा.
लापरवाही पर दर्ज होगा केस
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी वार्ड में कई अनुमतियां देने से पहले वहां के कुल ध्वनि प्रभाव का आकलन किया जाए. नियमों की अनदेखी करने पर ध्वनि प्रदूषण नियम, पर्यावरण संरक्षण कानून, विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का ध्यान नुकसान होने के बाद मामूली जुर्माना लगाने के बजाय रोकथाम पर होना चाहिए.
यह भी पढ़ें: नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत, E20 फ्यूल विवाद पर बने डीपफेक फोटो हटाने के आदेश
न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines